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A hindi and english blog aggregator
तुम ही कहो ?
Independence या In Dependence...?? क्या कहूँ तुम ही कहो....?? [read more]
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आज निकल पड़े अपना ही प्रचार-प्रसार करने -- बधाई देते जाइएगा
अपनी नियमित दिनचर्या के चलते शाम को मेल देखने बैठे तो एक मेल देखकर मजा आ गया। अपना नाम भी बैशाखनंदन के विजेताओं की श्रेणी में आ गया। [read more]
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डायन डायबिटीज का विकराल रूप
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I love this, how about you?
If you can't see this email, please click here. [read more]
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दो बड़े अजीब इंसिडेंट के साथ...... अजनबी मेरे शब्दों से खेल गया....: महफूज़
दो  बड़े ही अजीब इंसिडेंट हुए मेरे साथ....अभी कुछ दिन पहले की ही बात है.....  पहले इंसिडेंट में हुआ यह कि मैं टी. वी. देख रहा था शाम की चाय के साथ... तो सोचा कि चैनल चेंज कर लूं... तो रिमोट उठा कर चैनल चेंज करने लगा... तो चैनल चेंज ही नहीं हुआ... ... [read more]
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इक्कीसवीं सदी का पहला लाल सितारा-नेपाल : 2
चूँकि खुद भारत में ही 1980 का दशक आते-आते तेजी से राजनीति पर ऐसे तबके का कब्जा हो गया जो देश की पूँजी के हितों का प्रतिनिधित्व करता था न कि जनता के, इसलिए भी नेपाल के साथ अपने पारंपरिक संबंधों का और अपनी ताकतवर हैसियत का इस्तेमाल भारतीय शासकों ने ... [read more]
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सुधीर राघव: जो सुनायेगा, दिखायेगा-वही बच पायेगा
सुधीर राघव: जो सुनायेगा, दिखायेगा-वही बच पायेगा [read more]
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थ्री जी के पहले प्रस्तावित थी नंबर पोर्टेबिलिटी
तारीख पर तारीख ही मिल रही है एमएनपी में   कब स्वतंत्र होगा मोबाईल उपभोक्ता अपने आपरेटर को बदलने   ट्राई और सरकार के बीच रस्साकशी का आनंद ले रहे हैं आपरेटर   [read more]
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फोरलेन विवाद का सच ------------------- 21
क्यों बढ़ा मोबाईल कंपनियों का सिवनी के प्रति आकर्षण मोबाईल के क्षेत्र में सिवनी जिले में रिलायंस, बीएसएनएल दो ही कंपनियों ने मुख्य तौर पर अपना नेटवर्क स्थापित किया था। इनमें से भारत संचार निगम लिमिटेड का नेटवर्क हर जगह मिलने के चलते सिवनी को इसके ... [read more]
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अंधा बाँटे रेवड़ी फिर फिर अपनेहि लेय....मीडिया क्लब में यही चल रहा है क्या???
ये हैं वो मुखौटाधारी जो कि मीडिया क्लब ऑफ़ इंडिया नाम की वेबसाइट पर इस माह के सर्वश्रेष्ठ ब्लॉगर स्वीकारे गये हैं। जनाब मेरे द्वारा शुरू करे गये एक विमर्श में बिना जाने समझे मुँह मारने टपक पड़े। पहले तो शराफ़त अली का मुखौटा लगाए थे तो मुझे बड़ा भाई क ... [read more]
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जन्माष्टमी महोत्सव
आप सभी को कृष्ण जन्माष्टमी के इस पावन दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएँ! श्री कृष्ण की कृपा से आप और आपका परिवार सभी सुखी हो, मंगलमय हों, ऐसी प्रभु श्री कृष्ण से प्रार्थना करते हैं. कृष्ण जन्मोत्सव को धूमधाम से मनाने के प्रयोजनार्थ आप सभी के लिए प्रस्तु ... [read more]
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'शब्द श्री' सम्मान से विभूषित हुए मशहूर शायर मयंक
लखनऊ-३० अगस्त: लखनऊ की सुप्रसिद्ध सांस्कृतिक-साहित्यिक संस्था, 'शब्द' द्वारा देश के विख्यात गीत-गजलकार, के.के.सिंह 'मयंक' का सूचना निदेशालय के सभागार में भव्य सम्मान किया गया. साहित्यकारों, साहित्य प्रेमियों की खचाखच उपस्थिति से गर्म इस आयोजन ... [read more]
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जनपद के पूर्व कप्तान पुलिस शिरोडकर सहित 11 पुलिस कर्मियों के विरुद्ध अभियोग पंजीकृत करने का आदेश सी0जे0एम0 ने दिया
बाराबंकी।मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी सूर्य प्रकाश शर्मा ने उच्च न्यायालय इलाहाबाद की लखनऊ बेंच के आदेश के अनुपालन मेें जनपद के पूर्व पुलिस अधीक्षक एस0बी0शिरोडकर सहित 11 पुलिस कर्मियोें के विरुद्ध भुक्तभोगी/याची महेन्द्र कुमार शुक्ला की शिकायत पर बग ... [read more]
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earn by selling your old things
--------------------------------------------- Hi, I heard you want to get rid from your old stuff. I know a not bad web site to post an ad regarding buy or sell. I already tried it. Users started calling me just after I placed my post. In few ho ... [read more]
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22-23 अक्टूबर को खजुराहो में ग्लोबल इनवेस्टर्स मीट में भाग लेने का आग्रह
उद्योगपतियांे से मध्यप्रदेश में उद्योग लगाने के लिए मंत्री श्री विजयवर्गीय का आमंत्रण [read more]
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इक्कीसवीं सदी का पहला लाल सितारा-नेपाल : 1
बन्ने भाई एक शाम हल्के नशे में घर लौटे। पैर थोड़े लड़खड़ा रहे थे। आँखों में थोड़ी मस्ती थी और कुछ गुनगुना रहे थे। उनकी बेगम ने जब उन्हें देखा तो बोलीं, ‘‘कोई शर्म-लिहाज है कि नहीं आपको। आज सरे-शाम ही पी ली। बच्चे जाग रहे हैं, क्या सोचेंगे?’’ बन्ने भा ... [read more]
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क्यूँ कृष्ण ?
बहुत प्यार किया था राधा ने तुमसे तुम्हारी बांसुरी से कदम्ब की डार से यमुना के किनारे बैठी रही सुधबुध खोये नहीं थी परवाह उसे ज़माने की ना घरवालों की वो तो दीवानी थी बस तेरे नाम की कहाँ खबर थी उसे उन आँधियों की जो ले जाएगी कृष्ण को उससे दू ... [read more]
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आज़ादी अवाम की
YDF Indians, After all work on ground and activities across India YDF announcing it's exclusive youth movement "Azaadi Avaam Ki" in 24 states. All YDF state committees are directed to get ready for national meet in Delhi.*Date will be announced ... [read more]
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Ganga ke Kareeb: गंगा में प्रवाहित कर दो...............
Ganga ke Kareeb: गंगा में प्रवाहित कर दो...............: "हम गंगा के अस्तित्व के प्रति चिन्तत है मीडिया में भी काफी गंगा प्रदुषण को लेकर चिन्तन है हिन्दुओ की आस्था विश्वास त्यौहार व स्नान इससे जु..." [read more]
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आनंद श्रीवास्तव लिखता है तो पुण्य और डॉ.रूपेश श्रीवास्तव लिख दें तो पाप हो जाता है....
हमारे डॉ.साहब रूपेश जी तो ठहरे यारों के यार बस इसी स्वभाव के चलते किसी ने अपनी वेबसाइट पर लिखने का आग्रह करा तो चल पड़े लेकिन ये न देखा कि वहाँ कैसे मक्कार, धूर्त और मुखौटेबाज बौद्धिक जुगाली करके खुद को शरीफ़ जताने वालों की भीड़ जुटी हुई है और वेबसा ... [read more]
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सुधीर राघव: बोलो कौन पढ़ता है हिन्दी साहित्य#links
सुधीर राघव: बोलो कौन पढ़ता है हिन्दी साहित्य#links [read more]
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लोकतंत्र की गरिमा को जीभ के स्वाद पर कीमत लगवा रहे हैं
आजकल रोज़ा खोलने की सहज मजहबी परंपरा जो कि अफ़्तारी कहलाती है राजनैतिक पार्टियों की चटोरे लोगों की शाम की पार्टी में बदल चुकी है जहाँ आप कबाब से लेकर टिक्का तक उड़ा सकते हैं बस बदले में एक वोट देना होगा। थू है ऐसे चटोरे लोगों की थाली में जो लोकतंत्र ... [read more]
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रेशमा @ पिशाच का बदला 1
16 june 200763 वर्षीय साहिब सिंह वर्मा मजबूत कद काठी वाले धनाडय व्यक्ति थे । 42 सदस्यों वाले साहिब सिंह का संयुक्त परिवार और उनका अमीरी रहन सहन पुराने जमाने के किसी जमीदार की याद दिलाता था । साहिब सिंह खुद लेखपाल पद पर सरकारी नौकरी कर चुके थे । औ ... [read more]
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कृष्ण जन्माष्टमी पर..डा श्याम गुप्त के दो पद ....
१. ब्रज की भूमि भई है निहाल। आनंद कंद प्रकट भये ब्रज में, बिरज भये ब्रज ग्वाल । सुर - गंधर्व -अपसरा नाचहिं, गावहिं दै - दै ताल । आसिस देंय विष्णु, शिव, ब्रह्मा, मुसुकावें गोपाल। जसुमति द्वारे बजे बधायो, ढफ़ ढफ़ली खडताल । पुरजन परिजन ह ... [read more]
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रेशमा @ पिशाच का बदला 2
अब हम लोग चलते चलते बिलकुल नदी के किनारे आ गये थे । मेरी उंगलियों में एक स्पेशल चाबी का गुच्छा घूम रहा था । जिसमें छोटे साइज के । मगर शक्तिशाली चाकू । टार्च । और लाइटर जैसे कुछ आयटम फ़ंसे हुये थे । चलते चलते ही मैंने एक बबूल की कलम जितनी पतली टहनी ... [read more]
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रेशमा @ पिशाच का बदला 3
रात के ठीक दस बजे मैं वर्मा जी के साथ उनकी छत पर मौजूद था । और रेशमा को देखकर मैं पूरा हाल जान चुका था । रामवीर से भी मेरी मुलाकात हो चुकी थी । और बलात्कार के उस रहस्य पर से भी परदा उठ चुका था । दरअसल वर्मा जी के घर पहुंचने के बाद जब वर्मा जी मेर ... [read more]
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पारिवारिक सम्पत्ति विवाद के कारण जफर मुसीबत मंे पड़ा
बाराबंकी।रुदौली निवासी मो0जफर जिसका नाम बम के कारण सुर्खियों में आया दरअसल समपत्ति विवाद का शिकार है।उसने बुढापे में रफी मेमोरियल इण्टर कालेज मसौली से सेवा निवृत्त प्रधानाचार्य तमहीद फातिमा से अपनी पहली पत्नी परवीन की उपस्थिति में जनवरी 2010 में ... [read more]
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बैटरी से संचालित बम की अफवाह ने पुलिस के होश उड़ाए परन्तु बम फर्जी निकला
बाराबंकी।बाबरी मस्जिद राम जन्म भूमि मुकदमें का निर्णय आने पर शांति व्यवस्था के बिगड़ने की तैयारियों से चिन्तित पुलिस प्रशासन को आज जैसे ही यह सूचना मिली कि नगर के व्यस्ततम चैराहे लखपेड़ा बाग के पास एक बैटरी व टाइमर से संचालित बम पड़ा हुआ है,उसके पैर ... [read more]
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कर्नाटक महिला हिन्दी सेवा समिति , बंगलोर .....एक परिचय
कर्णाटक महिला सेवा समिति ,बन्गलोर----.एक अभिनव संस्था [read more]
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Women activist storm into the parliament demanding 33% reservation organised by NFIW and ANHAD
Women activist storm into the parliament demanding 33% reservation organised by NFIW and ANHAD over 30 women activist wearing specially designed aprons with image of parliament 33% women reservation written on the one side and on the other side s ... [read more]
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राम का नाम बदनाम मत करो
अमेरिकन साम्राज्यवाद के चहेते, इस देश और समाज को बांटने के लिए एस.एम.एस भारी संख्या में भेज रहे हैं जिसकी विषयवस्तु यह है राममंदिर के लिए प्रार्थना कीजिये 15 सितम्बर को कोर्ट का फैसला है इस मैसेज को आग की तरह फैलाना है जो हिन्दू राम का नहीं ... [read more]
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परेशान मीडियाकर्मी
अपनी कलम के बूते पर दूसरों का शोषण रोकने वाला विशेषतौर पर कस्बाई मीडियाकर्मी आज खुद ही सर्वाधिक शोषित है, कभी-कभी तो शोषकों(अख़बार मालिकों) की नीतियों से इस कद्र दुखी होता है कि उसे यह दुनिया ही नहीं सुहाती और अपनी जान तक दे देता है। ऐसी ही चर्चा ... [read more]
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सुधीर राघव: वेतनभोगी और नेता#links
सुधीर राघव: वेतनभोगी और नेता#links [read more]
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भ्रम !
बहुत बड़ी धरती मुझे मिली है मिला है बहुत बड़ा आकाश इस छोर से उस छोर तक क्षितिज का साथ है ! [read more]
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इंतज़ार उस गधे की तरह जो नट की लड़की के गिरने के इंतज़ार में है
आज शाम को अपने शहर की सड़कों को नापने के नियमित क्रम में हमारी मुलाकात हमारे एक मित्र से हो गई जो मानदेय प्रवक्ता के रूप में पास के जिले के महाविद्यालय में कार्यरत हैं। (मानदेय प्रवक्ता के बारे में बाद में) उसको देखते ही इधर-उधर की बातों के साथ ही ... [read more]
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किसानों की उपजाऊ जमीनों के अधिग्रहण के खिलाफ भाकपा द्वारा प्रदेशव्यापी आन्दोलन
लखनऊ 30 अगस्त। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के आह्वान पर आज पूरे प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर भाकपा कार्यकर्ताओं ने किसानों की उपजाऊ जमीनों के अधिग्रहण के खिलाफ जुलूस निकाले और धरना दिये। [read more]
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main......भूत बोल रहा हूँ..........!!!
मैं भूत बोल रहा हूँ..........!! [read more]
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main......भूत बोल रहा हूँ..........!!!
मैं भूत बोल रहा हूँ..........!! [read more]
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झूठ पहनकर...
ग़ज़लें [read more]
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एक अवांछित अ-पाठकीय प्रतिक्रिया / प्रसंग विभूति नारायण राय....
अशोक गुप्ता / कथाकार एवं आलोचकदरअसल हिन्दी साहित्य की दुनिया में लोग अपना मत अभिमत स्थितियों की स्वंतंत्र मेरिट पर, यथा समय  व्यक्त नहीं करते बल्कि उसे शातिराना ढंग से खुद का दामन बचाते हुए, किन्ही भी अप्रत्यक्ष  मुद्दे पर हो-हल्ले के  बीच व्यक्त ... [read more]
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डॉ. विजय कुमार सुखवानी की चार गज़लें
रचनाकार परिचय नाम- डॉ. विजय कुमार सुखवानी जन्म तिथि- ०१ अक्टूबर १९६९ जन्म स्थान- ग्वालियर म.प्र. शिक्षा- आई आई टी मुम्बई से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में पीएचडी भाषा ज्ञान- हिंदी अंग्रेजी उर्दू सिंधी सम्प्रति- रीडर मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग ... [read more]
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किसने बताया आवाज़ का रहस्य?
आवाज़ के बारे में प्राचीनकाल से ही वैज्ञानिकों ने काफी रिसर्च की है। आवाज पानी की लहर की तरह होती है, ये बात ग्रीक फिलास्फर क्रिसिप्पस (240BC) को मालूम थी। अरस्तू (384-322BC) ने बताया कि आवाज़ हवा में पानी की लहरों की तरह आगे बढ़ती है और जब कानों ... [read more]
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प्रतिभा कटियार की कवितायें
काफी आग्रहों के बाद प्रतिभा कटियार ने अपनी कवितायें भेजीं भी तो मेल का विषय लिखा- एक अकवि की कवितायें… लेकिन उनकी कवितायें और आलेख पढ़ते हुए मुझे तो वह हमेशा ही एक आदमक़द रचनाकार लगी हैं। आप भी पढ़िये और बताईये… [read more]
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मन के विचार...........
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बढ़ता भ्रष्टाचार और निठल्‍ला चिंतन करते बुद्धिजीवी
लोकसभा में सदस्यों के वेतन का मसला उठा। इस संदर्भ में मीडिया ने अपने समाचारों तथा बहस के द्वारा सिद्ध किया कि अधिकांश सांसदों की आय में कई गुना की वृद्धि हुई है। माना जा सकता है कि यह सब दूसरे रास्ते से हुआ होगा जिसपर आज देश चल रहा है। वस्तुतः दे ... [read more]
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युवा संवाद की स्थानीय इकाई भंग
युवा संवाद की स्थानीय इकाई तत्काल प्रभाव से भंग कर दी गयी है। [read more]
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विचार-बिगुल: आगरा में संपन्न ब्लोगर्स मीट के फोटोग्राफ्स
विचार-बिगुल: आगरा में संपन्न ब्लोगर्स मीट के फोटोग्राफ्स [read more]
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चूम चरण मत चोरों के तू – निराला
चूम चरण मत चोरों के तू – निराला ( a kavita poster by ravi kumar, rawatbhata) ००००० रवि कुमार [read more]
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जीवों द्वारा उपार्जित व्यवहार के रूप
हे मानवश्रेष्ठों, [read more]
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पटना में फ़ैज अहमद फ़ैज का जन्मशताब्दी समारोह
चित्र में बायें से - अरविन्द श्रीवास्तव, शहंशाह आलम, राजेन्द्र राजन, डा. इम्तियाज अहमद, डा. खगेन्द्र ठाकुर, डा. अली जावेद, शकीलसिद्दिकी, अरुण कमल,कर्मेन्दु शिशिर.....डा. व्रज कुमार पाण्डेय बिहार प्रगतिशील लेखक संध के तत्चावधान में माध्यमिक शिक्षक ... [read more]
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मैं कहाँ हूँ !!!
मैं हमेशा खो जाती हूँ फिर ढूंढती हूँ खुद को सबके दरवाज़े खटखटाती हूँ पर कहीं नहीं मिलती... दम घुटता तो है पर तलाश जारी है अपनी [read more]
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आतंकवाद के नाम पर भी तुष्टिकरण की नीति चालू है
भगवाधारियों से सावधान! देश के सर्वोच्च पदधारी मंत्री जी सावधान कर रहे हैं तो सावधान तो होना ही पड़ेगा। एक बार पहले भी चेताया गया था और कोई नहीं माना तो बम धमाके हो गये। देश में किस तरह की स्थिति बनती जा रही है इस पर कोई विचार नहीं किया जा रहा है ब ... [read more]
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है बुरा हाल मंहगाई की मार है
देश दिखता मुझे बहुत बीमार है........... [read more]
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ग़ज़ल
ग़ज़ल [read more]
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तीन हजार अमेरिकी सैनिकों ने अपनाया इस्लाम
क्या आपने भी सुना था कि खाड़ी युद्ध के दौरान तीन हजार अमेरिकी सैनिकों ने इस्लाम अपना लिया था। यह सच है। बहुत कम लोग जानते हैं कि इस बदलाव के पीछे कौन हैं? जिन लोगों ने इस्लाम की यह दावत इन अमेरिकी सैनिकों तक पहुंचाई उनमें से एक अहम शख्सियत हैं डॉ ... [read more]
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शाहिद मिर्ज़ा शाहिद की ग़ज़ल
शाहिद मिर्ज़ा शाहिद अजब वफ़ा के उसूलों से ये ”वफ़ाएं” हैं तेरी जफ़ाएं, ”अदाएं”, मेरी ”ख़ताएं” हैं [read more]
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जो गहरे में उतरे गुनहगार निकले..
मोहतरिम शरद जोशी जी, मुआफ करना, जब आप नहीं रहे तभी पता चला कि आप थे। गलती आप ही की रही कि इतनी देर लगा दी जाने में। आपके अनेक समकालीन आपसे पहले चले गए और अब अपने-अपने शरीरों, खबरों और पुरस्कारों में खूब ज़ोर-शोर से जिन्दा हैं। और तो और जो लोग आपके ... [read more]
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दर्द आम आदमी का
संवेदनशील कवि की दो लाइन से बात आरम्भ करते हैं-प्रश्नोत्तर चलते रहे,जीवन में चिरकाल,विक्रम मेरी जिन्दगी,वक्त बना वेताल। ये पंक्तियां देश के आम आदमी को समर्पित हैं। उस आदमी को जिसे मैं तब से जानता हूँ जब से अखबार पढना शुरू किया था। आम आदमी!मतलब,जो ... [read more]
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स्वंयरक्षा ही सुरक्षा
बंगलूरु एक बहुत ही तेजीसे बढ़ने वाले शहरों की दौड़ में शामिल हैं। आजसे दस साल पहले हैदराबाद के पीछे था। लेकिन अब जनगणना के अधार पे यह भारत का तीसरा बड़ा शहर माना जाता हैं। यहाँ हर रोज नए माँल और नए टावर्स खड़े होते हैं। हर टावर्स में कई ओफिसेस हो ... [read more]
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धरती के उपर है एक और समन्दर....!!
                                   धरती के उपर है एक और समन्दर....!! [read more]
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धरती के उपर है एक और समन्दर....!!
                                   धरती के उपर है एक और समन्दर....!! [read more]
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ज़हनी व रूहानी सेहत - रोज़े के साथ
रमजानुलमुबारक के मौके पर आज हम बात करते हैं कि रोज़े किस तरह इंसान के ज़हन व रूह को कूवत बख्शते हैं। [read more]
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17वां विश्व युवा एवं छात्र उत्सव
प्रत्येक विश्व युवा एवं छात्र उत्सव के पहले अंतर्राष्ट्रीय तैयारी बैठक (आईपीएम) का आयोजन एक परंपरा है। 17वें विश्व युवा एवं छात्र उत्सव के लिए आईपीएम का आयोजन काराकस, वेनेजुएला में हुआ जिसने 16वें विश्व युवा एवं छात्र उत्सव की मेजबानी की थी। आपीए ... [read more]
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अरुण देव की कवितायें
ढोल [read more]
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अनुकूलित संबंध और सहज-क्रियाएं
हे मानवश्रेष्ठों, [read more]
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किससे करुँ मै...!!!
किससे करूं मै बात ,उन जनाब की किससे करूं मै बात ,उन जनाब की जिनसे की है मुहब्बत बे-हिसाब कीदीखते नही वो दिन में ,रातें भी स्याह हुई हुई मद्धम रोशनाई मेरी वफ़ा-ए-महताब कीकिससे गिला करूं कहाँ तहरीर दूं ?कोई ढूंढ लाये तस्वीर मेरे ख्वाब कीबिखर ज ... [read more]
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....... तुम ही सो गये दास्ताँ कहते कहते। गज़लकार वसन्त नहीं रहे....
. [read more]
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जुदाई ,...!!!
दीया जलता रहा मेघ बरसते रहे ,उनके दीदार को नैन तरसते रहे ।जा बसे हो जब से पिया तुम परदेश में ,नैन इक-इक पल उसी राह में भटकते रहे ।कैसी टीस उठती है इस दिल के जख्म में ,दर्दे-जुदाई में रात-दिन बिलखते रहे ।जोडती हूँ माला बिताये लम्हों की मै सदा ,पर ... [read more]
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विचारों की चहलकदमी................
ये जो हमारा मन है ......बहुत बावरा है...........और इस मन में पनपते विचार उन्मुक्त पंछी........जो बस हर वक्त दूर गगन में उड़ना चाहते हैं .........कभी भोर की पहली किरण में.....कभी शाम की लाली में.......तो कभी रात की तन्हाई में............बस चहलकदमी ... [read more]
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अकेला जान कर मुझको हवा तेवर दिखाती है.
मेरी हिम्मत के पौधे को वो आकर सींच जाती है, अकेला जान कर मुझको, हवा तेवर दिखाती है. [read more]
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अमीरों की बल्लेबल्ले, गरीबों की थल्लेथल्ले
गरीबों का राशन डकार रहे है अमीर सफीदों, (हरियाणा) : सफीदों में अमीरों की बल्लेबल्ले है तथा गरीब थल्लेथल्ले है, क्योंकि सरकार द्वारा गरीबों के लिए शुरू की गई बी.पी.एल. राशन योजना से क्षेत्र के सैंकड़ों गरीब महरूम हैं। गरीबों के उत्थान के लिए सरका ... [read more]
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सुशील गंगवार
अभी कुछ इंतजार करो [read more]
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"दिन कुछ ऐसे गुजारता है कोई " – गुलज़ार & जगजीत सिंह
गुलज़ार जी एक बेमिसाल लेखक हैं और जब जगजीत सिंह जी उनके लफ्जों को सुर देते हैं तो वो एक दूसरे के पूरक बन जाते हैं ................. [read more]
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स्थायी ख़ुशी की प्रतीक्षा है ?
लेखकीय - यह सिर्फ़ विनय जी की ही बात नहीं है । प्रत्येक इंसान अपने जीवन में ऐसी स्थिति से कभी न कभी दो चार होता ही है । प्रभु की कृपा है । लगभग अठारह साल की निरन्तर तलाश और अथक मेहनत के बाद महाराज जी की कृपा से आज मेरे जीवन में किसी प्रकार का प्रश ... [read more]
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बीच में नहीं हैं अखबार
अखबार में छपने के लिए चाहिए [read more]
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पीपली लाइव
आजादी की ६३वी सालगिरह,सावन की बरसात,दोस्त के साथ, चले गए पीपली लाइव देखने। सालों बाद किसी फिल्म को थियेटर में देखने का मन बना था। बनना ही था। प्रिंट और इलेक्ट्रोनिक मीडिया ने इसकी इतनी बल्ले बल्ले की कि हमें ऐसा लगा अगर पीपली को नहीं देखा तो हमार ... [read more]
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स्वाधीनता दिवस पर विशेष रचना: गीत भारत माँ को नमन करें.... संजीव 'सलिल'
स्वाधीनता दिवस पर विशेष रचना: [read more]
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स्‍वतंत्रता दिवस की मंगलकामनायें
सभी मित्रों को स्‍वतंत्रता दिवस की अनेकानेक मंगलकामनायें।   मित्रों के साथ साँझा करें ! [read more]
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ले गये गुण्ड़े धनिया को बनाम आज़ादी
आज़ादी की पूर्व संध्या पर… बिना किसी भूमिका के, मित्रों द्वारा मेल से भेजा गया एक चित्र प्रस्तुत है… स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाओं के साथ…. ००००० रवि कुमार [read more]
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नमन शहीदों को...............
15 अगस्त 1947 हमारा प्रथम स्वतंत्रता दिवस...............वो दिवस जिसे सभी आँखें देख पाई न देख सके हमारे शहीद जवान जो अपनी मातृभूमि के लिये हंसते हंसते कुर्बान हो गये । आज हमारे 63वें स्वतंत्रता दिवस पर ‘श्री माखनलाल चतुर्वेदी जी’ की यह कविता उन सभ ... [read more]
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एक पौधा आज़ादी का......
आज़ादी का जश्न हम सब मना रहे हैं। लेकिन आज़ादी के मायने क्या हैं इस पर हम सब को सोचना चाहिये। हमें आज़ादी तो मिली पर उसके साथ कुछ ज़िम्मेदारियां भी आयीं। क्या हमने उन ज़िम्मेदारियों के प्रति ईमानदारी दिखाई? अगर नही तो आज फिर मौका है उस ज़िम्मेदार ... [read more]
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व्यवहार के सहज रूप और सहजवृत्तियां
हे मानवश्रेष्ठों, [read more]
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आखिर क्यूँ ,,,??
इस कदर को जिंदगी को क्यूँ उलझाते हैं लोगहैं जहाँ मुश्किले वहीं क्यूँ दिल लगते हैं लोग ॥ अनसुलझी पहेली बन के रह गयी जिन्दगी , फिर क्यूँ नही इस पहेली को सुलझाते हैं लोग ,। उलझी -उलझी जिन्दगी बन गयी है बोझ अगर, हंस -हंस कर क्यूँ नहीं इसे उठाते ... [read more]
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२०१० में भारत का व्यवस्था तंत्र और हम !
आज जानकर बड़ा आश्चर्य हुआ कि मै भारत जैसे दुनिया के सबसे अजीब देश में रह रहा हूँ ! क्या कहने इस देश के ! खैर अब आते हैं मूल मुद्दे पर ! काफी दिनों से व्यापक रूप से बहस चल रही है कि जनता बेवकूफ है जो गंदे नेताओं को चुनती है, नेता गंदे हैं, पुलिस ... [read more]
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क्यों हुआ है शहर ये बीमार उनसे पूछना.
बह्र रमल मुसम्मन महज़ूफ (२१२२ २१२२ २१२२ २१२) [read more]
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भगवान के घर देर है । अन्धेर नहीं है ।
आना है तो आ राह में कुछ देर नहीं है । भगवान के घर देर है । अन्धेर नहीं है । जब तुझसे न सुलझे तेरे उलझे हुये फ़न्दे । भगवान के इंसाफ़ पर सब छोड दे बन्दे । आना है तो आ राह में कुछ देर नहीं है । भगवान के घर देर है । अन्धेर नहीं है । खुद ही तेरी ... [read more]
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मेरे सतगुरु दीनदयाल काग से हंस बनाते है ।
मेरे सतगुरु दीनदयाल काग से हंस बनाते है । अजब है गुरुओं का दरबार । भरा जहां भक्ती का भंडार । शबद अनमोल सुनाते हैं । कि मन का भरम मिटाते हैं । मेरे सतगुरु दीनदयाल काग से हंस बनाते है । गुरूजी सत का देते ग्यान । जीव का हो ईश्वर से ध्यान । वो अ ... [read more]
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टिप्पणी देना भी एक कला है ।
टिप्पणी देना भी एक कला है ।जिस तरह अपने विचारों , अपने मन के भावों को शब्दों में पिरोकर हम लिखते हैं वो हमारी अपनी अनुभूती होती है अपने विचारों के प्रति .............वो विचार जो धीरे धीरे मानसपटल पर विचरते हुए लेखनी से कोरे कागज में रंग भर देते ह ... [read more]
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कुछ आधुनिक सा पुरातन बनाम पेंसिल घिसाई
कुछ आधुनिक सा पुरातन ( a pencil sketch by ravi kumar, rawatabhata ) बहुत पुरानी बात है, अक्सर पुरानी ही बातों का जिक्र किया जाता है. पर यह इतनी पुरानी भी नहीं, समय के सापेक्ष इस घटना को आधुनिक सा ही कुछ कह सकते हैं, परंतु वास्तव में यह पुरातन सा ... [read more]
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मेरा आसमां.............
आजकल चाँद बादलों के संग आँख मिचोली करता रहता है और मुझे मेरा आसमां कुछ यूं नजर आता है......................... [read more]
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कुछ नया नहीं!!
इधर कुछ नया नहीं [read more]
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कहाँ तिशनगी के नजारें मिलेंगे
बह्र मुतकारिब मुसम्मन् सालिम (१२२ १२२ १२२ १२२) [read more]
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बरसात का कहर
पिछली रात मेरे शहर कुमारसेन में भारी बरसात हुई। पिछली रात 11 बजे के बाद बर्षा शुरू हुई जिसने भयकर रूप धारण किया और रात 2:30 बजे तो बहुत ही पानी बरसा। इस वर्षा से काफी नुकसान हुआ । मेरे मित्र रमेश चौहान ने कुछ छाया चित्र भेजे है।  [read more]
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अब कहां है जाति प्रथा?ब
( यह आलेख हमे युवा संवाद उज्जैन की अपूर्वा ने भेजा है। आमतौर पर यह कहा जाता है कि जाति प्रथा अब ख़त्म हो रही है, कमज़ोर पड़ रही है…आदि-आदि…यह लेख तस्वीर का दूसरा रुख दिखाता है) [read more]
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थम नहीं रहा है थाईलैंड का संकट
थम नहीं रहा है थाईलैंड का संकट [read more]
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पीटीआई के दो वरिष्‍ठ पत्रकारों का निधन
केपी कृष्‍णाउन्‍नी का कोच्चि में निधन : कार्तिक बरुआ ने मुंबई में ली अंतिम सांस : पीटीआई के वरिष्ठ पत्रकार के पी कृष्णाउन्नी का सुबह कोच्चि के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। उनके परिवार ने बताया कि 92 साल के कृष्णाउन्नी पिछले कुछ समय से बीमार थ ... [read more]
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मुफलिसी के शिकार पत्रकारों का सवाल
श्रमजीवी पत्रकारों के वेतनमान को लेकर केंद्र सरकार की तरफ से बनाए गए वेज बोर्ड की दिल्ली में मंगलवार को हुई बैठक में जनसत्ता के पत्रकार अंबरीश कुमार ने देश भर के पत्रकारों की सामाजिक आर्थिक सुरक्षा का सवाल उठाया और बोर्ड ने इस सिलसिले ठोस कदम उठा ... [read more]
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प्रेमचंद जयंती पर
युवा संवाद, ग्वालियर [read more]
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अन्दर के तीन बन्दर....
नेता लोग ऐसा क्यूँ करते हैं ? संसद भवन सर पे लेकर नाचते हैं कभी कूदते हैं, चिल्लाते हैं, "बन्दर" की तरह उछलते हैं कभी तोड़ फोड़ तो कभी माइक उठाकर मारने दौड़ते, कभी अपनेही साथियों को कुचलते हैं [read more]
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धर्मयुद्ध
युद्ध कभी धार्मिक नहीं होता या फिर यों कहा तो युद्ध का कोई धर्म नहीं होता है यह बात अलग है कि विजय के बाद धर्म जयी के साथ हो जाता है यदि राम रावण युद्ध में रावण जीत गया होता तो हमारा सारा समय सीता को कुलटा कहते बीतता रात कायर, लक्ष्मण हिज ... [read more]
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एकांत श्रीवास्तव की दो कवितायें
यहां पढ़ें कवि और कविता पर एकांत श्रीवास्तव का वक्तव्य [read more]
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पाबला जी
लगभग एक माह तक अपने ब्‍लाग पर कुछ भी नहीं लिख पाया । इस दौरान पत्‍नी की अस्‍वस्‍थता के कारण चण्‍डीगढ़ था। आज जब नेट पर आया तो पाबला जी की दुर्घटना की खबर पढ़ी। जान कर दुख हुआ। आशा है पाबला जी अब ठीक होंगे। पाबला जी से मात्र एक बार फोन पर बात हुई ... [read more]
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मैंने अपने खोने का विज्ञापन अखबार में दे दिया है...: महफूज़
आज बहुत दिनों के बाद वक़्त मिला है कुछ लिखने का... वक़्त क्या .... समझ लीजिये मूड... बना है. इस दौरान सिर्फ पढ़ा है... और खूब पढ़ा है... लिखा भी है... वक़्त की कमी तो है ही... पर  वो कहते हैं ना कि वक़्त निकालना पड़ता है , सो, आज वक़्त निकाल लिया ... [read more]
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सुनो हिटलर
हम गाएंगे / अंधेरों में भी / जंगलों में भी / बस्तियों में भी / पहाड़ों पे भी / मैदानों में भी / आँखों से / होठों से / हाथों से / पाँवों से / समूचे जिस्म से / ओ हिटलर! हमारे घाव / हमारी झुर्रियाँ / हमारी बिवाइयाँ / हमारे बेवक़्त पके बाल / ह ... [read more]
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२१ वीं सदी में ज़ाती आधारित जनगणना तात्पर्य !
ज़ाती आधारित जनगणना का वास्तविक प्रयोजन क्या है ! क्या वाकई में भारत वर्ष की वर्त्तमान वस्तु स्तिथि के किसी सुधार के लिए यह कदम उठाया गया है ! या राजनैतिक पार्टियों के व्यक्तिगत ज़ाती आधारित वोट बैंक में सेंध मारने की कोशिश है ! क्षेत्रीय पार्ट ... [read more]
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भारत बंद!
बंद के नाम से देश के धन को क्यूँ जला रहे हैं यहाँ जिम्मेदार ही  जिम्मेदारियों को क्यूँ भुला रहे हैं यहाँ [read more]
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खुरदुरे पैर- बाबा नागार्जुन की पुण्यतिथि पर
खुब गए दूधिया निगाहों में फटी बिवाइयोंवाले खुरदरे पैर धँस गए कुसुम-कोमल मन में गुट्ठल घट्ठोंवाले कुलिश-कठोर पैर दे रहे थे गति रबड़-विहीन ठूँठ पैडलों को चला रहे थे एक नहीं, दो नहीं, तीन-तीन चक्र कर रहे थे मात त्रिविक्रम वामन के पुराने पै ... [read more]
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पार्क एस्टेट
जार्ज एवरेस्ट की खस्ताहाल यादगार [read more]
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शेक्सपियर ग़लत था.... नाम में बहुत कुछ रखा है.... : महफूज़
दुनिया में इन्सान जब जन्म लेता है, तब वह अपने साथ कोई नाम नहीं लाता. हाँ! फ़ौरी तौर पर उसका नामकरण कर दिया जाता है. जैसे:- पप्पू, बिल्लू, पिंकी, चिंटू, बाबू.. आदि और भी बहुत से नाम. नाम तो पैदा होने के कुछ दिनों पर रखा जाता है, जिसे  हम बाकायदा न ... [read more]
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मंगलेश डबराल की एक कविता
(आज मंगलेश जी का जन्मदिन है…मुझे उनसे व्यक्तिगत परिचय का सौभाग्य तो नहीं मिला लेकिन उनको लगातार पढ़ते हुए मुझे हमेशा एक परिचय का एहसास होता रहा है। आज सबद पर व्योमेश शुक्ल का आलेख पढ़कर मुझे उनकी ढेरों कवितायें याद आईं…उनमें से एक यहां…और शुभकामन ... [read more]
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लो क सं घ र्ष !: एक बार एक जज साहब बोले
न्यायिक कार्य से छुट्टी पाने के बाद कुछ देर के लिए जज साहब का हमारे साथ बैठना हुआ। बातचीत के दौरान जज साहब बोले, ‘‘ मेरा एक मुसलमान दोस्त राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का कार्यकर्ता है।’’ मेरा संबंध उस लोकसभा क्षेत्र है जहां से किसी जमाने में सुभ ... [read more]
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लो क सं घ र्ष !: ब्लॉग उत्सव 2010
सम्मानीय चिट्ठाकार बन्धुओं, [read more]
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लो क सं घ र्ष !: कौन है यह डेविड कोलमैन हेडली
डेविड कोलमैन हेडली का नाम मुम्बई की 26/11 की तबाही के बाद सामने आया। एक गुनहगार, इंसानियत का दुश्मन को फांसी की सजा अदालत से मिल चुकी है, दूसरे गुनहगार को अमेरिका बचाने में लगा हुआ है, यह गुनहगार और कोई नहीं यही है डेविड कोलमैन हेडली जो एफ0ब ... [read more]
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नच की दुनिया (परदे के पीछे की कहानी)
नच की दुनिया (परदे के पीछे की कहानी) [read more]
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इस्लाम धर्म के प्रमुख स्रोत
इस्लाम के मूल स्रोत दो है पहला कुरआन और दूसरा हदीस. [read more]
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भूमण्डलीय गांव में भूख का सवाल
एक आर्थिक सर्वसत्ता वाद गोलियों से नहीं वरन अकालों से हत्या करता है। [read more]
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इस्लाम धर्म के पांच महत्वपूर्ण स्तम्भ
इस्लाम में पांच बातों के बारे में ये कहा गया है कि ये इस्लाम के पांच स्तम्भ है. इन पाँचों स्तंभों में से एक भी स्तम्भ ढह जाये तो इस्लाम की पूरी इमारत ढह जाती है. कहने का मतलब ये है कि जब तक इन पांचो स्तंभों पर पूर्ण विश्वास और पालन न किया जाए क ... [read more]
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इस्लाम धर्म के प्रमुख मत व विश्वास
इस्लाम की परिभाषा इस्लाम शब्द अरबी भाषा का शब्द है जिसका अर्थ है अमन,शान्ति,अच्छाई,आत्मसमर्पण व सलामती. संक्षेप में ईश्वर के आदेशों और ईश्वर के पैगम्बर हजरत मुहम्मद सल्ल: की शिक्षाओं को इस्लाम कहते है. और इस्लाम के अनुयायी को मुस्लिम या मुसलमा ... [read more]
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राष्ट्रकवि रामधारी सिंह 'दिनकर'
राष्ट्रीयता एवं जागरण की चेतना के साथ-साथ भारत के गौरवमयी अतीत की पहचान तथा रुढियों की जंजीरों में जकड़ी वर्त्तमान व्यवस्था के प्रति असंतोष से उत्पन्न क्रांति की आहवान करने वाले राष्ट्रकवि रामधारी सिंह 'दिनकर' के व्यक्तित्व एवं कृतित्व का एक परिच ... [read more]
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वो बातें जिनसे मुसलमान इस्लाम से निकल जाता है
आज के इस दौर में जिहालत की वजह से मुसलमान मर्द और औरतें जो मुंह में आया बोल दिया करते हैं और कुछ ऐसी बातें भी बोल दिया करते हैं जिनसे आदमी इस्लाम से निकल जाता है मतलब काफिर हो जाता है और उसका निकाह भी टूट जाता है और उसे कोई खबर भी नहीं होती.अच ... [read more]
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अपने कंप्यूटर से प्रोग्राम को रिमूव करें पूरी तरह
अक्सर ऐसा होता है कि हम अपने कंप्यूटर से कोई सोफ्टवेयर या प्रोग्राम को रिमूव करते हैं तो वो प्रोग्राम all programs से तो हट जाता है लेकिन add or remove programs में उसकी एंट्री रह जाती और वहां हमें प्रोग्राम का नाम नज़र आ रहा होता है. ऐसा प्रो ... [read more]
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क़यामत के बारे में अकीदा
तौहीद व रिसालत की तरह क़यामत पर भी ईमान लाना जरूरी है.क़यामत का इनकार करने वाला काफिर है.हर मुसलमान के लिए इस अकीदे पर ईमान लाना जरूरी है कि एक दिन ये सारी दुनिया जमीन व आसमान बल्कि पूरा ब्रह्माण्ड फना(ख़त्म) हो जायेगा. इसी का नाम क़यामत या प्रलय ... [read more]
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मरने के बाद की दुनिया
मरने के बाद और क़यामत(प्रलय) से पहले दुनिया और आखिरत के बीच एक और दुनिया है जिसे आलमे बर्जख या बर्जखी दुनिया कहते हैं.सभी इंसानों और जिन्नात को मरने के बाद इसी दुनिया में रहना होता है.इस बर्जखी दुनिया में अपने अपने आमाल(कर्मों) के ऐतबार से किस ... [read more]
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नच की दुनिया (परदे के पीछे की कहानी) & Binny (DID2)
प्रिय दोस्तों, पाठकों एवं उल्टा तीर साथियो,  [read more]
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वायरस से बचें ऑटो प्ले आप्शन को ऑफ करके
ऑटोप्ले विंडोज का बहुत अच्छा फीचर है.ये ऑन होने पर हमारी सीडी या पेन ड्राइव कंप्यूटर में डालते ही ऑटो प्ले मतलब अपने आप खुल जाती है.हमें खोलने की मेहनत नहीं करनी पड़ती.लेकिन कई बार ऑटो प्ले होना बहुत खतरनाक भी हो जाता है जब हमारी सीडी या पेन ड ... [read more]
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दिल्ली की दहलीजः भानगढ़
भुतहे खंडहरों का सच पार्थिव कुमार अरावली की गोद में बिखरे भानगढ़ के खंडहरों को भले ही भूतों का डेरा मान लिया गया हो मगर सोलहवीं सदी के इस किले की घुमावदार गलियों में कभी जिंदगी मचला करती थी। किले के अंदर करीने से बनाए गए बाजार, खूबसूरत मंदिरों, ... [read more]
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बड़ा इमामबाड़ा, लखनऊ
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अनावश्यक ईमेल से पाएं छुटकारा
इन्टरनेट का सबसे ज्यादा इस्तेमाल ईमेल भेजने या मंगाने में किया जाता है जो की बिल्कुल मुफ्त सर्विस है और बहुत उपयोगी भी.लेकिन कुछ लोग मुफ्त होने के कारण इसका इस्तेमाल लोगों को परेशान करने के लिए करते हैं.कुछ यार दोस्त भी फ़ालतू मेल भेजते रहते ह ... [read more]
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भूमण्डलीय ग्राम से बहिष्कृत शहरी ग़रीब
ग़रीबी की बहस हमारे देश में बहुत पुरानी है। औपनिवेशिक ग़ुलामी से मुक्ति के बाद से ही हमारे विकास की तमाम योजनाओं में ग़रीबी हटाने और देश के भीतर व्याप्त सामाजार्थिक विषमता को दूर करने की बातें की जाती रहीं। लोकतांत्रिक प्रणाली और शायद गांधी के ग्राम ... [read more]
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किसका विकास- कैसा विकास?
(जाने-माने अर्थशास्त्री गिरीश मिश्र जी का यह आलेख अभी हाशिया पर पढ़ा … मुझे बेहद उपयोगी लगा तो यहां भी लगा दिया ) [read more]
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दिल्ली की दहलीजः फारुखनगर
मुगलों का महल बना बच्चों की क्रिकेट पिच पार्थिव कुमार फारुखनगर के रिटायर्ड टीचर राज कंवर गुप्ता तकरीबन 300 साल पुराने इस कस्बे के हर बाशिंदे को इसके शानदार माजी के बारे में बता देना चाहते हैं। उन्हें उम्मीद है कि ऐसा करके वह बादशाह फर्रुखसियर क ... [read more]
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अवध की रेजीड़ेंसी में फोटोज़
लोकसंघर्ष सुमन के साथ श्रीमती रामा रानी सिंह [read more]
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रेजीड़ेन्सी अवध
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दर्द
न जाने क्यू तुम बहोत यादआ रहे हो भुलाना चाहू तो ,भूल नही पाते हम , मिलने की आस है ,क्या मै इस जनम में तुम्हे मिल पाऊँगी ? तुम भी तो चाहते होंगे ,हम मिले ,बीते लम्हे याद करे तुम्हारा तुम जानो .मेरी दिली तमन्ना है ,मेरे इंतकाल से पहले पुरी ... [read more]
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क्रन्तिकारी भक्त कवि कबीरदास
हिन्दी साहित्य के भक्तिकाल के कवियों में कबीरदास निर्गुण भक्ति काव्य-धारा में उच्च स्थान पर विराजमान हैं। उनका व्यक्तित्व क्रन्तिकारी व्यक्तित्व है, उन्होंने अपनी बात बेबाक ढंग से कही भले ही वह सामने वाले को कितनी भी चुभी। यद्यपि कबीर के जीवन के ... [read more]
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लोकहितवादी भक्त कवि: तुलसीदास
हिन्दी साहित्य के भक्ति काल में भक्त कवियों ने अपने समाज और संस्कृति की रक्षा हेतु काव्य ग्रंथों की रचना की। इस काल में प्रवाहित होने वाली भक्ति काव्य धाराएँ सगुण काव्य तथा निर्गुण काव्य के रूप में दो हिस्सों में विभक्त थी। सगुण काव्य धारा की पुन ... [read more]
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