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मोयरंग : आजादी से पहले अंग्रेज हारे जंग
मोयरंग : आजादी से पहले अंग्रेज हारे जंग अंजनी निगम, कानपुर मणिपुर के मोयरंग में 15 अगस्त 1947 को आजादी के तीन साल चार माह पहले ही आजाद हिंद फौज के कर्नल शौकत मलिक ने अंग्रेज फौज को हराकर हिंदुस्तान का तिरंगा फहरा दिया था। पूर्व सैनिक सेवा परिषद ... [read more]
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आगे पढ़ें के आगे यहाँ [read more]
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इस्लाम की असलियत डच पेंटर के ब्रश से
अभी भी वक्त है मुसलिम आतंकवादियों के कुकर्मों को छुपाने के लिए गाली गलौच की भाषा का प्रयोग न करो।धर्म से हमारा कोई बासता नहीं लेकिन उन हिन्दूओं का तो ख्याल रखो जो हर वक्त मुसलिम आतंकवादियों का बचाब करने के लिए आपके साथ कड़े होते हैं और बदले में आ ... [read more]
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यास्मीन की कला में समाया कण्डोम
सतीश सिंह [read more]
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Mere Vichar: आ पहुंचा सृष्टि का काल
Mere Vichar: आ पहुंचा सृष्टि का काल [read more]
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परिकल्पना पर "ब्लॉग उत्सव-2010"
आपको यह जानकारी देते हुए वेहद हर्ष की अनुभूति हो रही है, कि हम परिकल्पना पर मनाने जा रहे हैं "परिकल्पना ब्लॉग उत्सव-2010" इस उत्सव का नारा होगा- " अनेक ब्लॉग एक हृदय "इस उत्सव में हम प्रस्तुत करेंगे कुछ कालजयी रचनाएँ , विगत दो वर्षों में प्रकाशित ... [read more]
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हिन्दी के लेखक संगठनों की दिमागी गुलामी का तानाबाना -1-
       उनकी आलोचना करो तो नाराज हो जाते हैं और प्रशंसा करो तो फूलकर कुप्पा हो जाते हैं। वे चाहते हैं सच को किंतु प्यार करते हैं झूठ को। रहते हैं हकीकत में जीते हैं कल्पना में। ऐसी अवस्था है हिन्दी के लेखक संगठनों की।     जो जितना बेहतरीन लेखक सा ... [read more]
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लो क सं घ र्ष !: वादा लपेट लो, जो लंगोटी नहीं तो क्या ?
अर्थशास्त्रियों ने हमारी जरूरतों को तीन भागों आवश्यक आवश्यकताओं, आरामदायक तथा विलासिताओं में बांटा है। आवश्यक में खाना, कपड़ा, मकान मुख्य है। मैं अक्सर शहरी एवं ग्रामीण बस्तियों से गुजरा और देखा कि झोपड़ियों से टी0वी0, रेडियों द्वारा प्रसारित प्रोग ... [read more]
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लो क सं घ र्ष !: वादा लपेट लो, जो लंगोटी नहीं तो क्या ?
अर्थशास्त्रियों ने हमारी जरूरतों को तीन भागों आवश्यक आवश्यकताओं, आरामदायक तथा विलासिताओं में बांटा है। आवश्यक में खाना, कपड़ा, मकान मुख्य है। मैं अक्सर शहरी एवं ग्रामीण बस्तियों से गुजरा और देखा कि झोपड़ियों से टी0वी0, रेडियों द्वारा प्रसारित प्रोग ... [read more]
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लो क सं घ र्ष !: वादा लपेट लो, जो लंगोटी नहीं तो क्या ?
अर्थशास्त्रियों ने हमारी जरूरतों को तीन भागों आवश्यक आवश्यकताओं, आरामदायक तथा विलासिताओं में बांटा है। आवश्यक में खाना, कपड़ा, मकान मुख्य है। मैं अक्सर शहरी एवं ग्रामीण बस्तियों से गुजरा और देखा कि झोपड़ियों से टी0वी0, रेडियों द्वारा प्रसारित प्रोग ... [read more]
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लो क सं घ र्ष !: वादा लपेट लो, जो लंगोटी नहीं तो क्या ?
अर्थशास्त्रियों ने हमारी जरूरतों को तीन भागों आवश्यक आवश्यकताओं, आरामदायक तथा विलासिताओं में बांटा है। आवश्यक में खाना, कपड़ा, मकान मुख्य है। मैं अक्सर शहरी एवं ग्रामीण बस्तियों से गुजरा और देखा कि झोपड़ियों से टी0वी0, रेडियों द्वारा प्रसारित प्रोग ... [read more]
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लो क सं घ र्ष !: वादा लपेट लो, जो लंगोटी नहीं तो क्या ?
अर्थशास्त्रियों ने हमारी जरूरतों को तीन भागों आवश्यक आवश्यकताओं, आरामदायक तथा विलासिताओं में बांटा है। आवश्यक में खाना, कपड़ा, मकान मुख्य है। मैं अक्सर शहरी एवं ग्रामीण बस्तियों से गुजरा और देखा कि झोपड़ियों से टी0वी0, रेडियों द्वारा प्रसारित प्रोग ... [read more]
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लो क सं घ र्ष !: वादा लपेट लो, जो लंगोटी नहीं तो क्या ?
अर्थशास्त्रियों ने हमारी जरूरतों को तीन भागों आवश्यक आवश्यकताओं, आरामदायक तथा विलासिताओं में बांटा है। आवश्यक में खाना, कपड़ा, मकान मुख्य है। मैं अक्सर शहरी एवं ग्रामीण बस्तियों से गुजरा और देखा कि झोपड़ियों से टी0वी0, रेडियों द्वारा प्रसारित प्रोग ... [read more]
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वादा लपेट लो, जो लंगोटी नहीं तो क्या ?
अर्थशास्त्रियों ने हमारी जरूरतों को तीन भागों आवश्यक आवश्यकताओं, आरामदायक तथा विलासिताओं में बांटा है। आवश्यक में खाना, कपड़ा, मकान मुख्य है। मैं अक्सर शहरी एवं ग्रामीण बस्तियों से गुजरा और देखा कि झोपड़ियों से टी0वी0, रेडियों द्वारा प्रसारित प्रोग ... [read more]
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बात तो कुछ भी ना थी
----- बात तो, कभी भी कुछ भी ना थी, मैं तो बस यूँ ही मुस्कुराता रहा, अपनों को खुश रखने के लिए अपने गम छिपाता रहा। ----- मेरे अन्दर झांकने वाले गुम हो गए दो नैन, कौन सुनेगा,किसको सुनाऊं कैसे मिले अब चैन। [read more]
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लो क सं घ र्ष !: हम डाक्टर भेजते हैं, सैनिक नहीं
हैती में प्राकृतिक आपदा, जिसने हमारे इस पड़ोसी देश को तबाह कर दिया, के दो दिन बाद 14 जनवरी 2010 को मैंने लिखा था, “स्वास्थ्य एवं अन्य क्षेत्रों में हैती के लोगों को क्यूबा का सहयोग मिला है यद्यपि वह एक छोटा सा और प्रतिबंधित देश है। हमारे करीब 400 ... [read more]
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लो क सं घ र्ष !: हम डाक्टर भेजते हैं, सैनिक नहीं
हैती में प्राकृतिक आपदा, जिसने हमारे इस पड़ोसी देश को तबाह कर दिया, के दो दिन बाद 14 जनवरी 2010 को मैंने लिखा था, “स्वास्थ्य एवं अन्य क्षेत्रों में हैती के लोगों को क्यूबा का सहयोग मिला है यद्यपि वह एक छोटा सा और प्रतिबंधित देश है। हमारे करीब 400 ... [read more]
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लो क सं घ र्ष !: हम डाक्टर भेजते हैं, सैनिक नहीं
हैती में प्राकृतिक आपदा, जिसने हमारे इस पड़ोसी देश को तबाह कर दिया, के दो दिन बाद 14 जनवरी 2010 को मैंने लिखा था, “स्वास्थ्य एवं अन्य क्षेत्रों में हैती के लोगों को क्यूबा का सहयोग मिला है यद्यपि वह एक छोटा सा और प्रतिबंधित देश है। हमारे करीब 400 ... [read more]
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लो क सं घ र्ष !: हम डाक्टर भेजते हैं, सैनिक नहीं
हैती में प्राकृतिक आपदा, जिसने हमारे इस पड़ोसी देश को तबाह कर दिया, के दो दिन बाद 14 जनवरी 2010 को मैंने लिखा था, “स्वास्थ्य एवं अन्य क्षेत्रों में हैती के लोगों को क्यूबा का सहयोग मिला है यद्यपि वह एक छोटा सा और प्रतिबंधित देश है। हमारे करीब 400 ... [read more]
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हैती में प्राकृतिक आपदा, जिसने हमारे इस पड़ोसी देश को तबाह कर दिया, के दो दिन बाद 14 जनवरी 2010 को मैंने लिखा था, “स्वास्थ्य एवं अन्य क्षेत्रों में हैती के लोगों को क्यूबा का सहयोग मिला है यद्यपि वह एक छोटा सा और प्रतिबंधित देश है। हमारे करीब 400 ... [read more]
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लो क सं घ र्ष !: हम डाक्टर भेजते हैं, सैनिक नहीं
हैती में प्राकृतिक आपदा, जिसने हमारे इस पड़ोसी देश को तबाह कर दिया, के दो दिन बाद 14 जनवरी 2010 को मैंने लिखा था, “स्वास्थ्य एवं अन्य क्षेत्रों में हैती के लोगों को क्यूबा का सहयोग मिला है यद्यपि वह एक छोटा सा और प्रतिबंधित देश है। हमारे करीब 400 ... [read more]
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लो क सं घ र्ष !: हम डाक्टर भेजते हैं, सैनिक नहीं
हैती में प्राकृतिक आपदा, जिसने हमारे इस पड़ोसी देश को तबाह कर दिया, के दो दिन बाद 14 जनवरी 2010 को मैंने लिखा था, “स्वास्थ्य एवं अन्य क्षेत्रों में हैती के लोगों को क्यूबा का सहयोग मिला है यद्यपि वह एक छोटा सा और प्रतिबंधित देश है। हमारे करीब 400 ... [read more]
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हम डाक्टर भेजते हैं, सैनिक नहीं
हैती में प्राकृतिक आपदा, जिसने हमारे इस पड़ोसी देश को तबाह कर दिया, के दो दिन बाद 14 जनवरी 2010 को मैंने लिखा था, “स्वास्थ्य एवं अन्य क्षेत्रों में हैती के लोगों को क्यूबा का सहयोग मिला है यद्यपि वह एक छोटा सा और प्रतिबंधित देश है। हमारे करीब 400 ... [read more]
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क्या जरूरी है शादी से पहले बातचीत?
शादी से पहले बातचीत जरूरी है या नही यह बहस का विषय है सच तो यह है कि समय परिवर्तन व जीवनशैली में आने वाले बदलावों का असर हमारे संबधों रीति -रिवाजों तौर तरीको पर भी पडता है । जब लडका-लडकी खुले शहरी वातावरण में पले हो तो यह सोचना असंभव सा है की है ... [read more]
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आरक्षण हमें भी दे दो
महिला आरक्षण विधेयक के अन्दर आरक्षण की माँग को लेकर हंगामा करने की जरूरत नहीं है। देश ही आरक्षण के सहारे चल रहा है। [read more]
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गीत: ओ! मेरे प्यारे अरमानों --संजीव 'सलिल'
गीत: [read more]
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मार्च 12: दिल्ली में वामपंथी पार्टियों की रैली
वामपथी पार्टियों-भाकपा, भाकपा (मा), आल इंडिया फारवर्ड ब्लाक तथा आरएसपी ने 12 मार्च 2010 को दिल्ली के रामलीला मैदान में एक अखिल भारतीय रैली के आयोजन का फैसला किया है। इस संदर्भ में ए.बी. बर्धन, महासचिव भाकपा, प्रकाश करात, महासचिव, भाकपा (मा.) देव ... [read more]
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मार्च 12: दिल्ली में वामपंथी पार्टियों की रैली
वामपथी पार्टियों-भाकपा, भाकपा (मा), आल इंडिया फारवर्ड ब्लाक तथा आरएसपी ने 12 मार्च 2010 को दिल्ली के रामलीला मैदान में एक अखिल भारतीय रैली के आयोजन का फैसला किया है। इस संदर्भ में ए.बी. बर्धन, महासचिव भाकपा, प्रकाश करात, महासचिव, भाकपा (मा.) देव ... [read more]
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देश की अस्मिता पर भारी व्यवसायिकता
हाकी के जादूगर मेज़र ध्यानचंद [read more]
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लो क सं घ र्ष !: देश की अस्मिता पर भारी व्यवसायिकता
हाकी के जादूगर मेज़र ध्यानचंद [read more]
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लो क सं घ र्ष !: देश की अस्मिता पर भारी व्यवसायिकता
हाकी के जादूगर मेज़र ध्यानचंद [read more]
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हाकी के जादूगर मेज़र ध्यानचंद [read more]
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देश की अस्मिता पर भारी व्यवसायिकता
हाकी के जादूगर मेज़र ध्यानचंद [read more]
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धर्म या जाति
आज समाज धर्म या जाति के भंवर में ऐसा फंसा हुआ है कि उचित-अनुचित की सुध-बुध ही खो सी गयी है! धर्मान्तरण पर तो चर्चा खूब जोर-शोर से होती है लेकिन इस पर गौर नहीं किया जाता के ये हो ही क्यों रहा है! [read more]
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ख़ुशी की आसान राह के साथ ही 'बड़ी कठिन है डगर पनघट की'
कल के शर्मनाक प्रदर्शन के बाद आज राज्यसभा में सात सांसदों के निलम्बन के बाद महिलाओं की चिरपरिचित प्रतीक्षा की समाप्ति का प्रथम चरण पूरा हुआ। राज्यसभा ने 186 के समर्थन और मात्र 01 के विरोध (वोटिंग के आधार पर) के साथ महिला आरक्षण विधेयक को पारित कर ... [read more]
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शर्मनाक! शर्मनाक!! शर्मनाक!!! शर्मनाक!!!! शर्मनाक!!!!!
शर्मनाक! महिला आरक्षण विधेयक संसद में पेश तो हुआ किन्तु पारित नहीं हो सका। [read more]
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राम निवास 'इंडिया' की रचना -- नारी दोहा दशक
नारी दोहा दशक [read more]
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गीतिका: भुज पाशों में कसता क्या है? --संजीव 'सलिल
गीतिका [read more]
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स्त्री "0" शुन्य है और पुरुष "1" एक है; महिला दिवस पर विशेष: सलीम ख़ान
स्त्री "0" शुन्य है और पुरुष "1" एक है. यह वाक्य पढ़ते ही ऐसा लगता है कि स्त्री पुरुष से कमतर है. ज़ाहिर सी बात है इस वाक्य के  भावार्थ से निकला परिणाम निश्चित रूप से स्त्री को पुरुष से कम अंक रहा है. मैं भी सिर्फ़ इतना कह कर जवाब-विहीन हो जाऊंगा ... [read more]
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महिला आरक्षण बिल के प्राविधानों से अपरिचित है मुख्य मंत्री मायावती
आज के अख़बारों में उत्तर प्रदेश की मुख्य मंत्री मायावती के हवाले से एक खबर छपी है कि मायावती ने महिला आरक्षण बिल का विरोध करते हुए कहा है कि महिला आरक्षण में अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लिए आरक्षण कि व्यवस्था होने तक उनकी पार्टी संसद एवं विधायिकाओ ... [read more]
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शहर में ग़रीब वाया शरद कोकास
( शरद कोकास किसी परिचय के मुहताज नहीं - न साहित्य जगत में और न ब्लाग जगत में…अभी अर्थात पर मैने शहरी ग़रीबी पर एक आलेख लगाया तो प्रतिक्रिया स्वरूप उन्होंने एक कविता लगायी। वह टिप्पणी में खो जाने वाली कविता नहीं है…तो उसे आप सब के लिये यहां प्रस्त ... [read more]
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डॉ0 अनिल चड्डा का गीत - जीवन भर की यादें
"गीत" [read more]
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भूमण्डलीय ग्राम से बहिष्कृत शहरी ग़रीब
ग़रीबी की बहस हमारे देश में बहुत पुरानी है। औपनिवेशिक ग़ुलामी से मुक्ति के बाद से ही हमारे विकास की तमाम योजनाओं में ग़रीबी हटाने और देश के भीतर व्याप्त सामाजार्थिक विषमता को दूर करने की बातें की जाती रहीं। लोकतांत्रिक प्रणाली और शायद गांधी के ग्राम ... [read more]
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... ताकि रिश्तों को टूटने से बचा पाएं
महानगरों में रहने वाले दंपतियों के बीच जल्दी आ जाती है तलाक की नौबत [read more]
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पता नहीं कितनी बची हो तुम मेरे भीतर!
तुम्हारी तरह होना चाहता हूं मैं [read more]
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हुसैन की पेंटिंग भारतमाता और अदालत का फ़ैसला
हुसैन की पेंटिंग भारतमाता और अदालत का फ़ैसला [read more]
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अपर्णा की तलाश
ये दो नज्में इमरोज़ जी ने भेजी है...........एक अपर्णा की है, और दूसरी नज़्म अपर्णा की नज़्म के जवाब में इमरोज़ की है . अपर्णा का पता उनसे खो गया और वे यह नज़्म उसे भेज नहीं सके......यह उनका प्रयास है मेरे द्वारा उन्हें ढूँढने का......मुझे विश् ... [read more]
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मोहम्मद उमर कैरान्वी को ब्लोगवाणी पर देख कैसा लगता है आपको, मुझे तो....
आज सुबह सुबह जैसे ही ब्लोगवाणी खोली तो देखा वहां पर "कहीं से कुछ ब्लॉग कालम में जनाब मोहम्मद उमर कैरान्वी साहब विराजमान हैं (दुसरी लाइन में बाएं से दुसरा चित्र) और मुझे उस सवाल का जवाब भी मिल गया जो कैरान्वी भाई पहले हमेशा से ब्लोगवाणी से करते आ ... [read more]
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रौनक अपहरण काण्ड के बहाने.......!!
झारखण्ड की राजधानी रांची में घटे रौनक अपहरण कांड के विभिन्न पहलुओं को देखते हुए यह जाहिर होता है कीसाईबर जगत और मोबाइल जगत की पैठ किस प्रकार अपराध जगत में बढती जा रही है,सूचना-संचार औरसुविधा के ये साधन किस प्रकार अपराध-जगत के अनिवार्य घटक बन चुके ... [read more]
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इस क़दर टूटा हूँ कि रोना चाहता हूँ....: महफूज़
कभी-कभी मन बहुत उदास होता है. कारण ख़ुद को भी नहीं पता होता. हम रोना तो चाहते हैं, लेकिन आंसू नहीं निकलते, मंज़िल सामने तो होती है लेकिन रास्तों का पता नहीं होता. विचारों का द्वंद्व  दिल-ओ-दिमाग़ में चलता रहता है लेकिन विचारों में ठहराव नहीं होता ... [read more]
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सलीम ख़ान और 'नारी' पर लिखे गए लेख: एक दृष्टि यहाँ भी !!!
क़ुरआने मजीद और नारी [read more]
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भविष्यफल और वैज्ञानिकता
(युवा दख़ल पत्रिका पिछले दो सालों से ग्वालियर युवा संवाद द्वारा निकाली जा रही है। इस बार इसमें कुल पन्ने हैं १६ और मूल्य ५ रु… कवर पेज़ बनाया भाई रवि कुमार रावतभाटा ने। मंगाने के लिये मुझे मेल करें या फोन... यहाँ इसी अंक से विष्णु नागर जी का एक आ ... [read more]
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इश्क ...!!!
दुनिया की नजर में इश्क करना हराम है ? तभी तो इश्क इतना दुनिया में बदनाम है । [read more]
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मेरी फितरत
विपरीत लहरों पर तैरना मेरी फितरत रही हादसों में ख़ुशी तलाशना मेरी फितरत रही आंसुओं के मध्य आबेहयात मिलना मेरी फितरत रही तभी- ज़िन्दगी मेरे साथ है [read more]
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ब्लागजगत के बारे में कुछ निष्कर्ष
कोई दो साल हुए जब मरा पहला परिचय ब्लागजगत से हुआ था..मुझे यह एक नयी दुनिया लगी थी और बड़े उत्साह से कम्प्यूटर से पूरी तरह अनजान होने के बावज़ूद मैने इस जगत में प्रवेश किया था। ब्लाग बनाया, लिखा और टिप्पणियां भी ख़ूब कीं। सहमतियां बनीं, तमाम दोस्त बन ... [read more]
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रंगो का त्यौहार मुबारक
होली है भई होली है...... बुरा ना मानो होली है....... रंग लगा दो होली है..... ख़ुशियाँ मना लो होली है..... गले मिल लो होली है...... शोर मचा लो होली है..... मैं भी खेलनी होली है..... मेरी तरफ से आप सभी को होली की शुभकामनाएं........ [read more]
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भूतनाथ को मिला नोबेल प्राईज....हुर्रा.....आहा....!!
मैं भूत बोल रहा हूँ..........!!हुर्रा....आहा....!!भाईयों और भाईयों...!! भूतनाथ को मिला साहित्य और शांति का नोबेल प्राईज....!!....विश्व की दुनिया की धरती के मेरे तमाम दोस्तों....मुझे आज आपको यह बताते हुए अपार हश्र हो रहा है कि आज एक अनाम-से अजीव ... [read more]
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रंग – कविता – रवि कुमार
रंग (a poem by ravi kumar, rawatabhata) [read more]
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आपका घर गच्ची वाला है
( देवास के हमारे साथी सौरभ का यह लेख युवा दख़ल के ताज़ा अंक में प्रकाशित है। होली की मस्तियों के बीच उम्मीद करता हूं आप इन्हें भी नहीं भुलेंगे!) [read more]
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अमेरिकन साम्राज्यवाद : अंतिम भाग
महायुद्ध [read more]
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नयी परिस्थितियां और हमारे कर्तव्य- अंतिम भाग
बेरोजगारी के आंकड़े बढ़ते गये हैं और आज वे योजना के प्रारंभिक दिनों की तुलना में और अधिक बढ़ गये हैं। आम लोगों पर टैक्सों का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। 1950 और 1960 के बीच में प्रत्यक्ष करों में मात्र 20 करोड़ रु. की वृद्धि हुई, लेकिन उसी अवधि में अ ... [read more]
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होली की शुभकामनायें
रंग प्यार का रंग आशीष का रंग हमारी भाषा का रंग हमारे देश का रंग हमारे कर्मठ जवानों का रंग हमारी आन-बान-शान का रंग हमारे संस्कारों का .... आओ हम अपनी नफरत का दहन करें और इन रंगों से अपना आज रंग लें .............. होली की शुभकामनायें [read more]
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हसरत -ए-दिल ...!!
तेरी हसरत थी जो दिल को ,वह खत्म हो गयी , अब वादे-वफा निभानी बस रस्म हो गयी । [read more]
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सब चुग जायेगी है ये चिड़िया !!
फुर्र से उड़ जाती है चिड़िया ! मेरे पास क्यूँ आती है चिड़िया !! हम कितना खुद को छिपा लें हो जाता है सब कुछ उरियां !! सामने जब भी वो आ जाए है चुप-चुप हो जाती है चिड़िया !! हमने जब भी उसको देखा है कुछ-कुछ कहती है चिड़िया !! मेरे भीतर जो"वो" रहता ... [read more]
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किस्मत....???
किस्मत में था न तेरा साथ, ये था नही पता , भुगत रहा दिल जिसने, प्यार की थी खता.......? [read more]
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Hack A website using SQL INJECTIONS
I want to show you just one way that hackers can get in to your website and mess it up, using a technique called SQL Injection. And then I'll show you how to fix it. This article touches on some technical topics, but I'll try to keep things as si ... [read more]
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Project IGI- I'm going in Cheats
some hacks of project igi game Soldiers are behave like civillian Go project IGI installed folder then goto commen\ai backup the folder ai, There will some files like "civlian.qvm", "guard.qvm" like that names of enemy's copy the file "civlian. ... [read more]
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सखियाँ खेलन को आई बन के स ...
सखियाँ खेलन को आई बन के सजना, मैं ना खेलूंगी तुम संग करो मोहे तंग ना। ---- साजन के रंग में रंगकर साजन की हो ली, तू तो हो गई री जोगन खेले ना होली। ---- घर घर धमाल मचाए सखियों की टोली, साजन परदेश बसा है कैसी ये होली। [read more]
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किसका विकास- कैसा विकास?
(जाने-माने अर्थशास्त्री गिरीश मिश्र जी का यह आलेख अभी हाशिया पर पढ़ा … मुझे बेहद उपयोगी लगा तो यहां भी लगा दिया ) [read more]
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महंगाई मार गई......
आजकल महंगाई ईतनी बढ़ गई  हैं की सब्जियों के दाम आसमान को छु रहे हैं. "घर की मुर्गी दाल बराबर" अब यह कहावत भी गलेसे नहीं उतर रही. कहावत के साथ साथ दाल और सब्जी का भी गलेसे उतरना एक कसरत  हो गया हैं. आम आदमी की भाग दौड़ देख कर टमाटर भी हस हसकर लाल ह ... [read more]
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न हमारी आग का रंग बदलेगा – महेन्द्र नेह
न हमारी आग का रंग बदलेगा – महेन्द्र नेह ( a kavita poster by ravi kumar, rawatbhata) शब्दों के कुछ समूह हमारी चेतना पर अचानक एक हथौडे़ की तरह पड़ते हैं, और हमें बुरी तरहझिंझोड़ डालते हैं. दरअसल हथौडे़ की तरह पड़ने और बुरी तरह झिंझोड़ डालने वाली उ ... [read more]
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जंगल के राजा की सियासत खतम होने की कगार पर
काफी चिंताजनक विषय है | डायनासौर ख़तम हुए | सारस ख़तम | गिद्ध ख़तम |मोर ख़तम होने की कगार पर हैं | शेर भी गायब हो जाएँगे | जंगल का राजा अब राजा नही रह गाया है | जंगल पर अब ऊंची ऊंची इमारतें बन गयी है, और उन पर अब इंसान राज कर रहा | बढ़ रहा है तो ... [read more]
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इसीलिए सिर्फ प्रेम करना चाहिए..: महफूज़
अन्नपूर्णा कूड़ा फेंकने घर के बाहर आई तो देखा कि तीन बूढ़े व्यक्ति घर के बाहर वाले चबूतरे पर बैठे हैं. अन्नपूर्णा ने उन्हें नहीं पहचानते हुए कहा " वैसे तो मैं आप लोगों को नहीं जानतीं, फिर भी घर के अन्दर आईये और कुछ भोजन ग्रहण कीजिये." [read more]
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MY NAME IS.....
                   दुनिया में सिर्फ दो तरह के लोग होते हैं  अच्छे और बुरे विचारधारा के , बहुत ही नेक सोच हैं इसपे   कोई दो राय  नहीं.     पिछले दस दिनोसे मैं येही देख रहा हूँ टीवि पर, नेट पर सभी जगह यही खबर थी इसके अलावा कुछ देखही नहीं  पाते  थे. ... [read more]
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चेतना के आधार के रूप में श्रम
हे मानवश्रेष्ठों, [read more]
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मदारी का खेल
                      एक गाँव में एक मदारी बन्दर का खेल दिखा रहा था.   और वहां बहुत सारे लोग जमा होकर बन्दर का खेल देख कर  मजा ले रहे थे. क्यूँ की गाँव उससे अच्छा मनोरंजन हो ही नहीं सकता था. लेकिन अब हमें हर जगह मदारी दिखाइ  देते हैं. और उसे देखन ... [read more]
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गुस्से में लिखी एक कविता
इन दिनों बेहद मुश्किल में है मेरा देश [read more]
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उम्र से अधिक दिखना औक़ात से अधिक दिखना होता है क्या?
(गीत चतुर्वेदी अपनी पीढ़ी के मेरे सबसे प्रिय कवियों में है। उसकी कवितायें बोलती हैं और वह अक्सर चुप रहता है। खोजने वाले उस पर तमाम लोगों का असर खोज सकते हैं पर मुझे उसमें एक ऐसी विशिष्ट मौलिकता दिखती है जिसके सहारे कोई उसकी कवितायें बिना नाम के भ ... [read more]
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मनुष्य और पशुओं के मानस में भेद
हे मानवश्रेष्ठों, [read more]
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क्या आप पुस्तक मेले जा रहे हैं?
साथियों [read more]
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चंदेरी, आमिर खान और कुमार अम्बुज
(हाल के दिनों में चंदेरी तब चर्चा में आया जब आमिर खान ने अपनी फिल्म के प्रचार के सिलसिले में वहां एक रात गुजारी। फ़िल्म सफल रही और अच्छा यह लगा कि इसके बाद भी आमिर चंदेरी के बुनकरों की दुर्दशा को भूले नही। जब यह मामला चर्चा में था तो मुझे कवि अग्र ... [read more]
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सत्ता व प्रभाव हासिल करने कि निम्न स्तरीय राजनीती
प्रिय भारतवासियों , पिछले कई दिनों से मेरे मन में राज ठाकरे जी के लिए विभिन्न प्रकार के विचार आ रहे हैं | ना जाने क्यों वो कई बार सपने में भी आ चुके हैं | और मराठी मानुस के प्रति उनका प्रेम देख के तो बड़े बड़े प्रेम करने वालों को भी इर्ष्या होने ... [read more]
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जज़्बा ग़र दिल में हो तो हर मुश्किल आसाँ हो जाती है... मिलिए हिंदुस्तान के एक उभरते हुए ग़ज़लकार से: महफूज़
कहते हैं.....कविता या शायरी ख़ुदा  की ज़ुबां होती है...और उस ज़ुबां  को हम तक पहुँचाने वाले लोग बहुत ख़ास होते हैं...ऐसे ही एक बहुत ख़ास शख्स से आज मैं आपका विसाल करवाने जा रहा हूँ..नाम है जनाब पवन कुमार सिंह. यूँ  तो इनका तार्रुफ़ मेरी आवाज़ या ... [read more]
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मानसिक कार्यकलाप के भौतिक अंगरूप में, मस्तिष्क
हे मानवश्रेष्ठों, [read more]
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युवा शक्ति के पुनर्निमाण व मार्गदर्शन की आवश्यकता
प्रिय भारतवासियों , हम प्रायः सुनते हैं की आज एक युवा ने पढाई से परेशान होकर, या किसी अन्य समस्या के बोझ तले आकर आत्महत्या कर ली | शेर के मुंह में हाथ डालकर दांत गिनने वाला भारत वर्ष का युवा आज इतना लाचार और बेबस हो गया है समाज और परिवेश की कठ ... [read more]
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ख़्वाहिशों को सर उठाना आ गया
आधार प्रकाशन से मंगाने के लिए पर 09417267004 फोन कर सकते हैं और किताब की कीमत है १०० रुपये. [read more]
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Serial key for tune up 2010
New version of tune up (2010) is also hacked [read more]
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अवध की रेजीड़ेंसी में फोटोज़
लोकसंघर्ष सुमन के साथ श्रीमती रामा रानी सिंह [read more]
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रेजीड़ेन्सी अवध
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प्रिंट मीडिया पर ब्लॉगचर्चा
प्रिंट मीडिया पर ब्लॉगचर्चा में लोकसंघर्ष [read more]
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दर्द
न जाने क्यू तुम बहोत यादआ रहे हो भुलाना चाहू तो ,भूल नही पाते हम , मिलने की आस है ,क्या मै इस जनम में तुम्हे मिल पाऊँगी ? तुम भी तो चाहते होंगे ,हम मिले ,बीते लम्हे याद करे तुम्हारा तुम जानो .मेरी दिली तमन्ना है ,मेरे इंतकाल से पहले पुरी ... [read more]
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