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Mar 12, 2010
| Author: ajit kumar mishra
| Source: भड़ास blog
मोयरंग : आजादी से पहले अंग्रेज हारे जंग
अंजनी निगम, कानपुर मणिपुर के मोयरंग में 15 अगस्त 1947 को आजादी के तीन साल चार माह पहले ही आजाद हिंद फौज के कर्नल शौकत मलिक ने अंग्रेज फौज को हराकर हिंदुस्तान का तिरंगा फहरा दिया था। पूर्व सैनिक सेवा परिषद ...
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Mar 12, 2010
| Author: ****kasmik****
| Source: हिन्दुस्तान का दर्द
आगे पढ़ें के आगे यहाँ
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Mar 12, 2010
| Author: HINDU TIGERS
| Source: लख़नऊ ब्लॉगर एसोसिएशन
अभी भी वक्त है मुसलिम आतंकवादियों के कुकर्मों को छुपाने के लिए गाली गलौच की भाषा का प्रयोग न करो।धर्म से हमारा कोई बासता नहीं लेकिन उन हिन्दूओं का तो ख्याल रखो जो हर वक्त मुसलिम आतंकवादियों का बचाब करने के लिए आपके साथ कड़े होते हैं और बदले में आ ...
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Mar 12, 2010
| Author: ****kasmik****
| Source: हिन्दुस्तान का दर्द
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Mar 12, 2010
| Author: अरुणेश मिश्र
| Source: लख़नऊ ब्लॉगर एसोसिएशन
Mere Vichar: आ पहुंचा सृष्टि का काल
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Mar 12, 2010
| Author: रवीन्द्र प्रभात
| Source: लख़नऊ ब्लॉगर एसोसिएशन
आपको यह जानकारी देते हुए वेहद हर्ष की अनुभूति हो रही है, कि हम परिकल्पना पर मनाने जा रहे हैं "परिकल्पना ब्लॉग उत्सव-2010" इस उत्सव का नारा होगा- " अनेक ब्लॉग एक हृदय "इस उत्सव में हम प्रस्तुत करेंगे कुछ कालजयी रचनाएँ , विगत दो वर्षों में प्रकाशित ...
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Mar 12, 2010
| Author: जगदीश्वर चतुर्वेदी
| Source: भड़ास blog
उनकी आलोचना करो तो नाराज हो जाते हैं और प्रशंसा करो तो फूलकर कुप्पा हो जाते हैं। वे चाहते हैं सच को किंतु प्यार करते हैं झूठ को। रहते हैं हकीकत में जीते हैं कल्पना में। ऐसी अवस्था है हिन्दी के लेखक संगठनों की।
जो जितना बेहतरीन लेखक सा ...
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Mar 12, 2010
| Author: Suman
| Source: Ganga ke Kareeb
अर्थशास्त्रियों ने हमारी जरूरतों को तीन भागों आवश्यक आवश्यकताओं, आरामदायक तथा विलासिताओं में बांटा है। आवश्यक में खाना, कपड़ा, मकान मुख्य है। मैं अक्सर शहरी एवं ग्रामीण बस्तियों से गुजरा और देखा कि झोपड़ियों से टी0वी0, रेडियों द्वारा प्रसारित प्रोग ...
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Mar 12, 2010
| Author: Suman
| Source: kabira khada bazar mein
अर्थशास्त्रियों ने हमारी जरूरतों को तीन भागों आवश्यक आवश्यकताओं, आरामदायक तथा विलासिताओं में बांटा है। आवश्यक में खाना, कपड़ा, मकान मुख्य है। मैं अक्सर शहरी एवं ग्रामीण बस्तियों से गुजरा और देखा कि झोपड़ियों से टी0वी0, रेडियों द्वारा प्रसारित प्रोग ...
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Mar 12, 2010
| Author: Suman
| Source: भड़ास
अर्थशास्त्रियों ने हमारी जरूरतों को तीन भागों आवश्यक आवश्यकताओं, आरामदायक तथा विलासिताओं में बांटा है। आवश्यक में खाना, कपड़ा, मकान मुख्य है। मैं अक्सर शहरी एवं ग्रामीण बस्तियों से गुजरा और देखा कि झोपड़ियों से टी0वी0, रेडियों द्वारा प्रसारित प्रोग ...
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Mar 12, 2010
| Author: Suman
| Source: TheNetPress.Com
अर्थशास्त्रियों ने हमारी जरूरतों को तीन भागों आवश्यक आवश्यकताओं, आरामदायक तथा विलासिताओं में बांटा है। आवश्यक में खाना, कपड़ा, मकान मुख्य है। मैं अक्सर शहरी एवं ग्रामीण बस्तियों से गुजरा और देखा कि झोपड़ियों से टी0वी0, रेडियों द्वारा प्रसारित प्रोग ...
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Mar 12, 2010
| Author: Suman
| Source: हिन्दुस्तान का दर्द
अर्थशास्त्रियों ने हमारी जरूरतों को तीन भागों आवश्यक आवश्यकताओं, आरामदायक तथा विलासिताओं में बांटा है। आवश्यक में खाना, कपड़ा, मकान मुख्य है। मैं अक्सर शहरी एवं ग्रामीण बस्तियों से गुजरा और देखा कि झोपड़ियों से टी0वी0, रेडियों द्वारा प्रसारित प्रोग ...
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Mar 12, 2010
| Author: Suman
| Source: भड़ास blog
अर्थशास्त्रियों ने हमारी जरूरतों को तीन भागों आवश्यक आवश्यकताओं, आरामदायक तथा विलासिताओं में बांटा है। आवश्यक में खाना, कपड़ा, मकान मुख्य है। मैं अक्सर शहरी एवं ग्रामीण बस्तियों से गुजरा और देखा कि झोपड़ियों से टी0वी0, रेडियों द्वारा प्रसारित प्रोग ...
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Mar 12, 2010
| Author: Suman
| Source: लो क सं घ र्ष !
अर्थशास्त्रियों ने हमारी जरूरतों को तीन भागों आवश्यक आवश्यकताओं, आरामदायक तथा विलासिताओं में बांटा है। आवश्यक में खाना, कपड़ा, मकान मुख्य है। मैं अक्सर शहरी एवं ग्रामीण बस्तियों से गुजरा और देखा कि झोपड़ियों से टी0वी0, रेडियों द्वारा प्रसारित प्रोग ...
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Mar 12, 2010
| Author: नारदमुनि
| Source: रंगकर्मी Rangkarmi
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बात तो, कभी भी
कुछ भी ना थी,
मैं तो बस यूँ ही
मुस्कुराता रहा,
अपनों को खुश
रखने के लिए
अपने गम
छिपाता रहा।
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मेरे अन्दर झांकने वाले
गुम हो गए दो नैन,
कौन सुनेगा,किसको सुनाऊं
कैसे मिले अब चैन।
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Mar 11, 2010
| Author: Suman
| Source: TheNetPress.Com
हैती में प्राकृतिक आपदा, जिसने हमारे इस पड़ोसी देश को तबाह कर दिया, के दो दिन बाद 14 जनवरी 2010 को मैंने लिखा था, “स्वास्थ्य एवं अन्य क्षेत्रों में हैती के लोगों को क्यूबा का सहयोग मिला है यद्यपि वह एक छोटा सा और प्रतिबंधित देश है। हमारे करीब 400 ...
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Mar 11, 2010
| Author: Suman
| Source: भड़ास
हैती में प्राकृतिक आपदा, जिसने हमारे इस पड़ोसी देश को तबाह कर दिया, के दो दिन बाद 14 जनवरी 2010 को मैंने लिखा था, “स्वास्थ्य एवं अन्य क्षेत्रों में हैती के लोगों को क्यूबा का सहयोग मिला है यद्यपि वह एक छोटा सा और प्रतिबंधित देश है। हमारे करीब 400 ...
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Mar 11, 2010
| Author: Suman
| Source: लोक वेब मीडिया
हैती में प्राकृतिक आपदा, जिसने हमारे इस पड़ोसी देश को तबाह कर दिया, के दो दिन बाद 14 जनवरी 2010 को मैंने लिखा था, “स्वास्थ्य एवं अन्य क्षेत्रों में हैती के लोगों को क्यूबा का सहयोग मिला है यद्यपि वह एक छोटा सा और प्रतिबंधित देश है। हमारे करीब 400 ...
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Mar 11, 2010
| Author: Suman
| Source: भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी बाराबंकी
हैती में प्राकृतिक आपदा, जिसने हमारे इस पड़ोसी देश को तबाह कर दिया, के दो दिन बाद 14 जनवरी 2010 को मैंने लिखा था, “स्वास्थ्य एवं अन्य क्षेत्रों में हैती के लोगों को क्यूबा का सहयोग मिला है यद्यपि वह एक छोटा सा और प्रतिबंधित देश है। हमारे करीब 400 ...
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हैती में प्राकृतिक आपदा, जिसने हमारे इस पड़ोसी देश को तबाह कर दिया, के दो दिन बाद 14 जनवरी 2010 को मैंने लिखा था, “स्वास्थ्य एवं अन्य क्षेत्रों में हैती के लोगों को क्यूबा का सहयोग मिला है यद्यपि वह एक छोटा सा और प्रतिबंधित देश है। हमारे करीब 400 ...
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Mar 11, 2010
| Author: Suman
| Source: kabira khada bazar mein
हैती में प्राकृतिक आपदा, जिसने हमारे इस पड़ोसी देश को तबाह कर दिया, के दो दिन बाद 14 जनवरी 2010 को मैंने लिखा था, “स्वास्थ्य एवं अन्य क्षेत्रों में हैती के लोगों को क्यूबा का सहयोग मिला है यद्यपि वह एक छोटा सा और प्रतिबंधित देश है। हमारे करीब 400 ...
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Mar 11, 2010
| Author: Suman
| Source: Ganga ke Kareeb
हैती में प्राकृतिक आपदा, जिसने हमारे इस पड़ोसी देश को तबाह कर दिया, के दो दिन बाद 14 जनवरी 2010 को मैंने लिखा था, “स्वास्थ्य एवं अन्य क्षेत्रों में हैती के लोगों को क्यूबा का सहयोग मिला है यद्यपि वह एक छोटा सा और प्रतिबंधित देश है। हमारे करीब 400 ...
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Mar 11, 2010
| Author: Suman
| Source: लो क सं घ र्ष !
हैती में प्राकृतिक आपदा, जिसने हमारे इस पड़ोसी देश को तबाह कर दिया, के दो दिन बाद 14 जनवरी 2010 को मैंने लिखा था, “स्वास्थ्य एवं अन्य क्षेत्रों में हैती के लोगों को क्यूबा का सहयोग मिला है यद्यपि वह एक छोटा सा और प्रतिबंधित देश है। हमारे करीब 400 ...
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Mar 11, 2010
| Author: Sunita Sharma
| Source: उल्टा तीर
शादी से पहले बातचीत जरूरी है या नही यह बहस का विषय है सच तो यह है कि समय परिवर्तन व जीवनशैली में आने वाले बदलावों का असर हमारे संबधों रीति -रिवाजों तौर तरीको पर भी पडता है । जब लडका-लडकी खुले शहरी वातावरण में पले हो तो यह सोचना असंभव सा है की है ...
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Mar 11, 2010
| Author: डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
| Source: रायटोक्रेट कुमारेन्द्र
महिला आरक्षण विधेयक के अन्दर आरक्षण की माँग को लेकर हंगामा करने की जरूरत नहीं है। देश ही आरक्षण के सहारे चल रहा है।
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Mar 10, 2010
| Author: दिव्य नर्मदा divya narmada
| Source: kabira khada bazar mein
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Mar 10, 2010
| Author: Suman
| Source: भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी बाराबंकी
वामपथी पार्टियों-भाकपा, भाकपा (मा), आल इंडिया फारवर्ड ब्लाक तथा आरएसपी ने 12 मार्च 2010 को दिल्ली के रामलीला मैदान में एक अखिल भारतीय रैली के आयोजन का फैसला किया है।
इस संदर्भ में ए.बी. बर्धन, महासचिव भाकपा, प्रकाश करात, महासचिव, भाकपा (मा.) देव ...
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वामपथी पार्टियों-भाकपा, भाकपा (मा), आल इंडिया फारवर्ड ब्लाक तथा आरएसपी ने 12 मार्च 2010 को दिल्ली के रामलीला मैदान में एक अखिल भारतीय रैली के आयोजन का फैसला किया है।
इस संदर्भ में ए.बी. बर्धन, महासचिव भाकपा, प्रकाश करात, महासचिव, भाकपा (मा.) देव ...
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Mar 10, 2010
| Author: Suman
| Source: लोक वेब मीडिया
हाकी के जादूगर मेज़र ध्यानचंद
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Mar 10, 2010
| Author: Suman
| Source: TheNetPress.Com
हाकी के जादूगर मेज़र ध्यानचंद
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Mar 10, 2010
| Author: Suman
| Source: Ganga ke Kareeb
हाकी के जादूगर मेज़र ध्यानचंद
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Mar 10, 2010
| Author: Suman
| Source: भड़ास
हाकी के जादूगर मेज़र ध्यानचंद
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Mar 10, 2010
| Author: Suman
| Source: लो क सं घ र्ष !
हाकी के जादूगर मेज़र ध्यानचंद
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Mar 10, 2010
| Author: kunwarji's
| Source: उल्टा तीर
आज समाज धर्म या जाति के भंवर में ऐसा फंसा हुआ है कि उचित-अनुचित की सुध-बुध ही खो सी गयी है! धर्मान्तरण पर तो चर्चा खूब जोर-शोर से होती है लेकिन इस पर गौर नहीं किया जाता के ये हो ही क्यों रहा है!
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Mar 9, 2010
| Author: डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
| Source: रायटोक्रेट कुमारेन्द्र
कल के शर्मनाक प्रदर्शन के बाद आज राज्यसभा में सात सांसदों के निलम्बन के बाद महिलाओं की चिरपरिचित प्रतीक्षा की समाप्ति का प्रथम चरण पूरा हुआ। राज्यसभा ने 186 के समर्थन और मात्र 01 के विरोध (वोटिंग के आधार पर) के साथ महिला आरक्षण विधेयक को पारित कर ...
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Mar 9, 2010
| Author: डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
| Source: रायटोक्रेट कुमारेन्द्र
शर्मनाक! महिला आरक्षण विधेयक संसद में पेश तो हुआ किन्तु पारित नहीं हो सका।
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Mar 9, 2010
| Author: शब्दकार-डॉo कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
| Source: शब्दकार
नारी दोहा दशक
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Mar 8, 2010
| Author: आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'
| Source: शब्दकार
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Mar 8, 2010
| Author: सलीम ख़ान
| Source: स्वच्छ सन्देश: हिन्दोस्तान की आवाज़
स्त्री "0" शुन्य है और पुरुष "1" एक है. यह वाक्य पढ़ते ही ऐसा लगता है कि स्त्री पुरुष से कमतर है. ज़ाहिर सी बात है इस वाक्य के भावार्थ से निकला परिणाम निश्चित रूप से स्त्री को पुरुष से कम अंक रहा है. मैं भी सिर्फ़ इतना कह कर जवाब-विहीन हो जाऊंगा ...
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Mar 8, 2010
| Author: Communist Party of India, U.P. State Council
| Source: भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, उत्तर प्रदेश राज्य कौंसिल
आज के अख़बारों में उत्तर प्रदेश की मुख्य मंत्री मायावती के हवाले से एक खबर छपी है कि मायावती ने महिला आरक्षण बिल का विरोध करते हुए कहा है कि महिला आरक्षण में अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लिए आरक्षण कि व्यवस्था होने तक उनकी पार्टी संसद एवं विधायिकाओ ...
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Mar 7, 2010
| Author: अशोक कुमार पाण्डेय
| Source: हमकलम : वह जो मैं नहीं लिख पाया
( शरद कोकास किसी परिचय के मुहताज नहीं - न साहित्य जगत में और न ब्लाग जगत में…अभी अर्थात पर मैने शहरी ग़रीबी पर एक आलेख लगाया तो प्रतिक्रिया स्वरूप उन्होंने एक कविता लगायी। वह टिप्पणी में खो जाने वाली कविता नहीं है…तो उसे आप सब के लिये यहां प्रस्त ...
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Mar 7, 2010
| Author: Dr.Anil Chadah
| Source: शब्दकार
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Mar 7, 2010
| Author: अशोक कुमार पाण्डेय
| Source: अर्थात
ग़रीबी की बहस हमारे देश में बहुत पुरानी है। औपनिवेशिक ग़ुलामी से मुक्ति के बाद से ही हमारे विकास की तमाम योजनाओं में ग़रीबी हटाने और देश के भीतर व्याप्त सामाजार्थिक विषमता को दूर करने की बातें की जाती रहीं। लोकतांत्रिक प्रणाली और शायद गांधी के ग्राम ...
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Mar 6, 2010
| Author: DONGRE तृष्णा
| Source: उल्टा तीर
महानगरों में रहने वाले दंपतियों के बीच जल्दी आ जाती है तलाक की नौबत
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Mar 6, 2010
| Author: अशोक कुमार पाण्डेय
| Source: असुविधा
तुम्हारी तरह होना चाहता हूं मैं
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Mar 6, 2010
| Author: रवि कुमार, रावतभाटा
| Source: सृजन और सरोकार
हुसैन की पेंटिंग भारतमाता और अदालत का फ़ैसला
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Mar 6, 2010
| Author: रश्मि प्रभा...
| Source: मेरी भावनायें...
ये दो नज्में इमरोज़ जी ने भेजी है...........एक अपर्णा की है, और दूसरी नज़्म अपर्णा की नज़्म के जवाब में इमरोज़ की है .
अपर्णा का पता उनसे खो गया और वे यह नज़्म उसे भेज नहीं सके......यह उनका प्रयास है मेरे द्वारा उन्हें ढूँढने का......मुझे
विश् ...
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Mar 6, 2010
| Author: सलीम ख़ान
| Source: स्वच्छ सन्देश: हिन्दोस्तान की आवाज़
आज सुबह सुबह जैसे ही ब्लोगवाणी खोली तो देखा वहां पर "कहीं से कुछ ब्लॉग कालम में जनाब मोहम्मद उमर कैरान्वी साहब विराजमान हैं (दुसरी लाइन में बाएं से दुसरा चित्र) और मुझे उस सवाल का जवाब भी मिल गया जो कैरान्वी भाई पहले हमेशा से ब्लोगवाणी से करते आ ...
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Mar 5, 2010
| Author: भूतनाथ
| Source: रांचीहल्ला
झारखण्ड की राजधानी रांची में घटे रौनक अपहरण कांड के विभिन्न पहलुओं को देखते हुए यह जाहिर होता है कीसाईबर जगत और मोबाइल जगत की पैठ किस प्रकार अपराध जगत में बढती जा रही है,सूचना-संचार औरसुविधा के ये साधन किस प्रकार अपराध-जगत के अनिवार्य घटक बन चुके ...
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Mar 5, 2010
| Author: महफूज़ अली
| Source: मेरी रचनाएँ !!!!!!!!!!!!!!!!!
कभी-कभी मन बहुत उदास होता है. कारण ख़ुद को भी नहीं पता होता. हम रोना तो चाहते हैं, लेकिन आंसू नहीं निकलते, मंज़िल सामने तो होती है लेकिन रास्तों का पता नहीं होता. विचारों का द्वंद्व दिल-ओ-दिमाग़ में चलता रहता है लेकिन विचारों में ठहराव नहीं होता ...
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Mar 5, 2010
| Author: सलीम ख़ान
| Source: स्वच्छ सन्देश: हिन्दोस्तान की आवाज़
क़ुरआने मजीद और नारी
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Mar 5, 2010
| Author: अशोक कुमार पाण्डेय
| Source: युवा दखल
(युवा दख़ल पत्रिका पिछले दो सालों से ग्वालियर युवा संवाद द्वारा निकाली जा रही है। इस बार इसमें कुल पन्ने हैं १६ और मूल्य ५ रु… कवर पेज़ बनाया भाई रवि कुमार रावतभाटा ने। मंगाने के लिये मुझे मेल करें या फोन... यहाँ इसी अंक से विष्णु नागर जी का एक आ ...
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Mar 4, 2010
| Author: कमलेश वर्मा
| Source: kcverma :के.सी.वर्मा
दुनिया की नजर में इश्क करना हराम है ?
तभी तो इश्क इतना दुनिया में बदनाम है ।
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Mar 4, 2010
| Author: रश्मि प्रभा...
| Source: मेरी भावनायें...
विपरीत लहरों पर तैरना
मेरी फितरत रही
हादसों में ख़ुशी तलाशना
मेरी फितरत रही
आंसुओं के मध्य
आबेहयात मिलना
मेरी फितरत रही
तभी-
ज़िन्दगी मेरे साथ है
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Mar 3, 2010
| Author: अशोक कुमार पाण्डेय
| Source: युवा दखल
कोई दो साल हुए जब मरा पहला परिचय ब्लागजगत से हुआ था..मुझे यह एक नयी दुनिया लगी थी और बड़े उत्साह से कम्प्यूटर से पूरी तरह अनजान होने के बावज़ूद मैने इस जगत में प्रवेश किया था। ब्लाग बनाया, लिखा और टिप्पणियां भी ख़ूब कीं। सहमतियां बनीं, तमाम दोस्त बन ...
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Mar 1, 2010
| Author: Shahnawaz Khan
| Source: रंगकर्मी Rangkarmi
होली है भई होली है......
बुरा ना मानो होली है.......
रंग लगा दो होली है.....
ख़ुशियाँ मना लो होली है.....
गले मिल लो होली है......
शोर मचा लो होली है.....
मैं भी खेलनी होली है.....
मेरी तरफ से आप सभी को होली की शुभकामनाएं........
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Feb 28, 2010
| Author: भूतनाथ
| Source: रांचीहल्ला
मैं भूत बोल रहा हूँ..........!!हुर्रा....आहा....!!भाईयों और भाईयों...!!
भूतनाथ को मिला साहित्य और शांति का नोबेल प्राईज....!!....विश्व की दुनिया की धरती के मेरे तमाम दोस्तों....मुझे आज आपको यह बताते हुए अपार हश्र हो रहा है कि आज एक अनाम-से अजीव ...
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Feb 28, 2010
| Author: रवि कुमार, रावतभाटा
| Source: सृजन और सरोकार
रंग
(a poem by ravi kumar, rawatabhata)
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Feb 27, 2010
| Author: अशोक कुमार पाण्डेय
| Source: युवा दखल
( देवास के हमारे साथी सौरभ का यह लेख युवा दख़ल के ताज़ा अंक में प्रकाशित है। होली की मस्तियों के बीच उम्मीद करता हूं आप इन्हें भी नहीं भुलेंगे!)
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Feb 27, 2010
| Author: Suman
| Source: लोक वेब मीडिया
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Feb 25, 2010
| Author: Suman
| Source: भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी बाराबंकी
बेरोजगारी के आंकड़े बढ़ते गये हैं और आज वे योजना के प्रारंभिक दिनों की तुलना में और अधिक बढ़ गये हैं।
आम लोगों पर टैक्सों का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। 1950 और 1960 के बीच में प्रत्यक्ष करों में मात्र 20 करोड़ रु. की वृद्धि हुई, लेकिन उसी अवधि में अ ...
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Feb 25, 2010
| Author: रश्मि प्रभा...
| Source: मेरी भावनायें...
रंग प्यार का
रंग आशीष का
रंग हमारी भाषा का
रंग हमारे देश का
रंग हमारे कर्मठ जवानों का
रंग हमारी आन-बान-शान का
रंग हमारे संस्कारों का ....
आओ हम अपनी नफरत का दहन करें
और इन रंगों से अपना आज रंग लें
..............
होली की शुभकामनायें
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Feb 25, 2010
| Author: कमलेश वर्मा
| Source: kcverma :के.सी.वर्मा
तेरी हसरत थी जो दिल को ,वह खत्म हो गयी ,
अब वादे-वफा निभानी बस रस्म हो गयी ।
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Feb 25, 2010
| Author: भूतनाथ
| Source: रांचीहल्ला
फुर्र से उड़ जाती है चिड़िया !
मेरे पास क्यूँ आती है चिड़िया !!
हम कितना खुद को छिपा लें
हो जाता है सब कुछ उरियां !!
सामने जब भी वो आ जाए है
चुप-चुप हो जाती है चिड़िया !!
हमने जब भी उसको देखा है
कुछ-कुछ कहती है चिड़िया !!
मेरे भीतर जो"वो" रहता ...
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Feb 24, 2010
| Author: कमलेश वर्मा
| Source: kcverma :के.सी.वर्मा
किस्मत में था न तेरा साथ, ये था नही पता ,
भुगत रहा दिल जिसने, प्यार की थी खता.......?
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Feb 22, 2010
| Author: Amar Pratap Singh
| Source: Tips By Amar
I want to show you just one way that hackers can get in to your website and mess it up, using a technique called SQL Injection. And then I'll show you how to fix it. This article touches on some technical topics, but I'll try to keep things as si ...
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Feb 21, 2010
| Author: Amar Pratap Singh
| Source: Tips By Amar
some hacks of project igi game Soldiers are behave like civillian Go project IGI installed folder then goto commen\ai backup the folder ai,
There will some files like "civlian.qvm", "guard.qvm" like that names of
enemy's copy the file "civlian. ...
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Feb 21, 2010
| Author: नारदमुनि
| Source: रंगकर्मी Rangkarmi
सखियाँ खेलन को आई
बन के सजना,
मैं ना खेलूंगी तुम संग
करो मोहे तंग ना।
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साजन के रंग में रंगकर
साजन की हो ली,
तू तो हो गई री जोगन
खेले ना होली।
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घर घर धमाल मचाए
सखियों की टोली,
साजन परदेश बसा है
कैसी ये होली।
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Feb 20, 2010
| Author: अशोक कुमार पाण्डेय
| Source: अर्थात
(जाने-माने अर्थशास्त्री गिरीश मिश्र जी का यह आलेख अभी हाशिया पर पढ़ा … मुझे बेहद उपयोगी लगा तो यहां भी लगा दिया )
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Feb 20, 2010
| Author: Truth or Dare
| Source: Truth OR Dare
आजकल महंगाई ईतनी बढ़ गई हैं की सब्जियों के दाम आसमान को छु रहे हैं. "घर की मुर्गी दाल बराबर" अब यह कहावत भी गलेसे नहीं उतर रही. कहावत के साथ साथ दाल और सब्जी का भी गलेसे उतरना एक कसरत हो गया हैं. आम आदमी की भाग दौड़ देख कर टमाटर भी हस हसकर लाल ह ...
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Feb 20, 2010
| Author: रवि कुमार, रावतभाटा
| Source: सृजन और सरोकार
न हमारी आग का रंग बदलेगा – महेन्द्र नेह
( a kavita poster by ravi kumar, rawatbhata)
शब्दों के कुछ समूह हमारी चेतना पर अचानक एक हथौडे़ की तरह पड़ते हैं, और हमें बुरी तरहझिंझोड़ डालते हैं. दरअसल हथौडे़ की तरह पड़ने और बुरी तरह झिंझोड़ डालने वाली उ ...
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Feb 19, 2010
| Author: Suyash Deep Rai
| Source: Suyash Deep Rai
काफी चिंताजनक विषय है | डायनासौर ख़तम हुए | सारस ख़तम | गिद्ध ख़तम |मोर ख़तम होने की कगार पर हैं | शेर भी गायब हो जाएँगे | जंगल का राजा अब राजा नही रह गाया है | जंगल पर अब ऊंची ऊंची इमारतें बन गयी है, और उन पर अब इंसान राज कर रहा | बढ़ रहा है तो ...
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Feb 18, 2010
| Author: महफूज़ अली
| Source: मेरी रचनाएँ !!!!!!!!!!!!!!!!!
अन्नपूर्णा कूड़ा फेंकने घर के बाहर आई तो देखा कि तीन बूढ़े व्यक्ति घर के बाहर वाले चबूतरे पर बैठे हैं. अन्नपूर्णा ने उन्हें नहीं पहचानते हुए कहा " वैसे तो मैं आप लोगों को नहीं जानतीं, फिर भी घर के अन्दर आईये और कुछ भोजन ग्रहण कीजिये."
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Feb 14, 2010
| Author: Truth or Dare
| Source: Truth OR Dare
दुनिया में सिर्फ दो तरह के लोग होते हैं अच्छे और बुरे विचारधारा के , बहुत ही नेक सोच हैं इसपे कोई दो राय नहीं. पिछले दस दिनोसे मैं येही देख रहा हूँ टीवि पर, नेट पर सभी जगह यही खबर थी इसके अलावा कुछ देखही नहीं पाते थे. ...
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Feb 13, 2010
| Author: समय
| Source: समय के साये में
हे मानवश्रेष्ठों,
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Feb 9, 2010
| Author: Truth or Dare
| Source: Truth OR Dare
एक गाँव में एक मदारी बन्दर का खेल दिखा रहा था. और वहां बहुत सारे लोग जमा होकर बन्दर का खेल देख कर मजा ले रहे थे. क्यूँ की गाँव उससे अच्छा मनोरंजन हो ही नहीं सकता था. लेकिन अब हमें हर जगह मदारी दिखाइ देते हैं. और उसे देखन ...
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Feb 9, 2010
| Author: अशोक कुमार पाण्डेय
| Source: असुविधा
इन दिनों बेहद मुश्किल में है मेरा देश
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Feb 7, 2010
| Author: अशोक कुमार पाण्डेय
| Source: असुविधा
(गीत चतुर्वेदी अपनी पीढ़ी के मेरे सबसे प्रिय कवियों में है। उसकी कवितायें बोलती हैं और वह अक्सर चुप रहता है। खोजने वाले उस पर तमाम लोगों का असर खोज सकते हैं पर मुझे उसमें एक ऐसी विशिष्ट मौलिकता दिखती है जिसके सहारे कोई उसकी कवितायें बिना नाम के भ ...
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Feb 6, 2010
| Author: समय
| Source: समय के साये में
हे मानवश्रेष्ठों,
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Feb 4, 2010
| Author: अशोक कुमार पाण्डेय
| Source: अर्थात
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Feb 3, 2010
| Author: अशोक कुमार पाण्डेय
| Source: हमकलम : वह जो मैं नहीं लिख पाया
(हाल के दिनों में चंदेरी तब चर्चा में आया जब आमिर खान ने अपनी फिल्म के प्रचार के सिलसिले में वहां एक रात गुजारी। फ़िल्म सफल रही और अच्छा यह लगा कि इसके बाद भी आमिर चंदेरी के बुनकरों की दुर्दशा को भूले नही। जब यह मामला चर्चा में था तो मुझे कवि अग्र ...
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Jan 27, 2010
| Author: Suyash Deep Rai
| Source: Suyash Deep Rai
प्रिय भारतवासियों ,
पिछले कई दिनों से मेरे मन में राज ठाकरे जी के लिए विभिन्न प्रकार के विचार आ रहे हैं | ना जाने क्यों वो कई बार सपने में भी आ चुके हैं | और मराठी मानुस के प्रति उनका प्रेम देख के तो बड़े बड़े प्रेम करने वालों को भी इर्ष्या होने ...
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Jan 27, 2010
| Author: महफूज़ अली
| Source: मेरी रचनाएँ !!!!!!!!!!!!!!!!!
कहते हैं.....कविता या शायरी ख़ुदा की ज़ुबां होती है...और उस ज़ुबां को हम तक पहुँचाने वाले लोग बहुत ख़ास होते हैं...ऐसे ही एक बहुत ख़ास शख्स से आज मैं आपका विसाल करवाने जा रहा हूँ..नाम है जनाब पवन कुमार सिंह. यूँ तो इनका तार्रुफ़ मेरी आवाज़ या ...
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Jan 24, 2010
| Author: समय
| Source: समय के साये में
हे मानवश्रेष्ठों,
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Jan 18, 2010
| Author: Suyash Deep Rai
| Source: Suyash Deep Rai
प्रिय भारतवासियों ,
हम प्रायः सुनते हैं की आज एक युवा ने पढाई से परेशान होकर, या किसी अन्य समस्या के बोझ तले आकर आत्महत्या कर ली | शेर के मुंह में हाथ डालकर दांत गिनने वाला भारत वर्ष का युवा आज इतना लाचार और बेबस हो गया है समाज और परिवेश की कठ ...
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Jan 11, 2010
| Author: अशोक कुमार पाण्डेय
| Source: हमकलम : वह जो मैं नहीं लिख पाया
आधार प्रकाशन से मंगाने के लिए पर 09417267004 फोन कर सकते हैं और किताब की कीमत है १०० रुपये.
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Jan 2, 2010
| Author: Amar Pratap Singh
| Source: Tips By Amar
New version of tune up (2010) is also hacked
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Jan 1, 2010
| Author: Suman
| Source: लोकसंघर्ष छाया
लोकसंघर्ष सुमन के साथ श्रीमती रामा रानी सिंह
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Jan 1, 2010
| Author: Suman
| Source: लोकसंघर्ष छाया
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Dec 16, 2009
| Author: Suman
| Source: लोकसंघर्ष छाया
प्रिंट मीडिया पर ब्लॉगचर्चा में लोकसंघर्ष
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Nov 22, 2009
| Author: Jyoti
| Source: KVITA & MERE SAPNE
न जाने क्यू तुम बहोत यादआ रहे हो
भुलाना चाहू तो ,भूल नही पाते हम ,
मिलने की आस है ,क्या मै इस जनम में तुम्हे मिल पाऊँगी ?
तुम भी तो चाहते होंगे ,हम मिले ,बीते लम्हे याद करे
तुम्हारा तुम जानो .मेरी दिली तमन्ना है ,मेरे इंतकाल से पहले
पुरी ...
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