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Sep 2, 2010
| Author: deepakyk
| Source: भड़ास blog
Independence या In Dependence...?? क्या कहूँ तुम ही कहो....??
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Sep 2, 2010
| Author: डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
| Source: रायटोक्रेट कुमारेन्द्र
अपनी नियमित दिनचर्या के चलते शाम को मेल देखने बैठे तो एक मेल देखकर मजा आ गया। अपना नाम भी बैशाखनंदन के विजेताओं की श्रेणी में आ गया।
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Sep 2, 2010
| Author: Dr. O.P.Verma
| Source: भड़ास blog
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Sep 2, 2010
| Author: RAM VISHAL DEV, EK MUHIM
| Source: भड़ास blog
If you can't see this email, please click here.
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Sep 2, 2010
| Author: महफूज़ अली
| Source: मेरी रचनाएँ !!!!!!!!!!!!!!!!!
दो बड़े ही अजीब इंसिडेंट हुए मेरे साथ....अभी कुछ दिन पहले की ही बात है..... पहले इंसिडेंट में हुआ यह कि मैं टी. वी. देख रहा था शाम की चाय के साथ... तो सोचा कि चैनल चेंज कर लूं... तो रिमोट उठा कर चैनल चेंज करने लगा... तो चैनल चेंज ही नहीं हुआ... ...
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Sep 2, 2010
| Author: Suman
| Source: लो क सं घ र्ष !
चूँकि खुद भारत में ही 1980 का दशक आते-आते तेजी से राजनीति पर ऐसे तबके का कब्जा हो गया जो देश की पूँजी के हितों का प्रतिनिधित्व करता था न कि जनता के, इसलिए भी नेपाल के साथ अपने पारंपरिक संबंधों का और अपनी ताकतवर हैसियत का इस्तेमाल भारतीय शासकों ने ...
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Sep 2, 2010
| Author: सुधीर
| Source: kabira khada bazar mein
सुधीर राघव: जो सुनायेगा, दिखायेगा-वही बच पायेगा
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Sep 2, 2010
| Author: LIMTY KHARE लिमटी खरे
| Source: रोजनामचा
तारीख पर तारीख ही मिल रही है एमएनपी में
कब स्वतंत्र होगा मोबाईल उपभोक्ता अपने आपरेटर को बदलने
ट्राई और सरकार के बीच रस्साकशी का आनंद ले रहे हैं आपरेटर
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Sep 2, 2010
| Author: LIMTY KHARE लिमटी खरे
| Source: रोजनामचा
क्यों बढ़ा मोबाईल कंपनियों का सिवनी के प्रति आकर्षण
मोबाईल के क्षेत्र में सिवनी जिले में रिलायंस, बीएसएनएल दो ही कंपनियों ने मुख्य तौर पर अपना नेटवर्क स्थापित किया था। इनमें से भारत संचार निगम लिमिटेड का नेटवर्क हर जगह मिलने के चलते सिवनी को इसके ...
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Sep 2, 2010
| Author: Dr.Rupesh Shrivastava
| Source: भड़ास
ये हैं वो मुखौटाधारी जो कि मीडिया क्लब ऑफ़ इंडिया नाम की वेबसाइट पर इस माह के सर्वश्रेष्ठ ब्लॉगर स्वीकारे गये हैं। जनाब मेरे द्वारा शुरू करे गये एक विमर्श में बिना जाने समझे मुँह मारने टपक पड़े। पहले तो शराफ़त अली का मुखौटा लगाए थे तो मुझे बड़ा भाई क ...
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Sep 1, 2010
| Author: नरेन्द्र व्यास
| Source: आखर कलश
आप सभी को कृष्ण जन्माष्टमी के इस पावन दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएँ! श्री कृष्ण की कृपा से आप और आपका परिवार सभी सुखी हो, मंगलमय हों, ऐसी प्रभु श्री कृष्ण से प्रार्थना करते हैं. कृष्ण जन्मोत्सव को धूमधाम से मनाने के प्रयोजनार्थ आप सभी के लिए प्रस्तु ...
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Sep 1, 2010
| Author: डा. महाराज सिंह परिहार
| Source: विचार-बिगुल
लखनऊ-३० अगस्त: लखनऊ की सुप्रसिद्ध सांस्कृतिक-साहित्यिक संस्था, 'शब्द' द्वारा देश के विख्यात गीत-गजलकार, के.के.सिंह 'मयंक' का सूचना निदेशालय के सभागार में भव्य सम्मान किया गया. साहित्यकारों, साहित्य प्रेमियों की खचाखच उपस्थिति से गर्म इस आयोजन ...
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Sep 1, 2010
| Author: Suman
| Source: लोक वेब मीडिया
बाराबंकी।मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी सूर्य प्रकाश शर्मा ने उच्च न्यायालय इलाहाबाद की लखनऊ बेंच के आदेश के अनुपालन मेें जनपद के पूर्व पुलिस अधीक्षक एस0बी0शिरोडकर सहित 11 पुलिस कर्मियोें के विरुद्ध भुक्तभोगी/याची महेन्द्र कुमार शुक्ला की शिकायत पर बग ...
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Sep 1, 2010
| Author: आनन्द पाण्डेय
| Source: लख़नऊ ब्लॉगर एसोसिएशन
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Hi, I heard you want to get rid from your old stuff. I know a not bad web site to post an ad regarding buy or sell. I already tried it. Users started calling me just after I placed my post. In few ho ...
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Sep 1, 2010
| Author: LIMTY KHARE लिमटी खरे
| Source: रोजनामचा
उद्योगपतियांे से मध्यप्रदेश में उद्योग लगाने के लिए मंत्री श्री विजयवर्गीय का आमंत्रण
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Sep 1, 2010
| Author: Suman
| Source: लो क सं घ र्ष !
बन्ने भाई एक शाम हल्के नशे में घर लौटे। पैर थोड़े लड़खड़ा रहे थे। आँखों में थोड़ी मस्ती थी और कुछ गुनगुना रहे थे। उनकी बेगम ने जब उन्हें देखा तो बोलीं, ‘‘कोई शर्म-लिहाज है कि नहीं आपको। आज सरे-शाम ही पी ली। बच्चे जाग रहे हैं, क्या सोचेंगे?’’ बन्ने भा ...
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Sep 1, 2010
| Author: रश्मि प्रभा...
| Source: मेरी भावनायें...
बहुत प्यार किया था राधा ने तुमसे
तुम्हारी बांसुरी से
कदम्ब की डार से
यमुना के किनारे बैठी रही
सुधबुध खोये
नहीं थी परवाह उसे ज़माने की
ना घरवालों की
वो तो दीवानी थी बस तेरे नाम की
कहाँ खबर थी उसे उन आँधियों की
जो ले जाएगी कृष्ण को उससे दू ...
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Sep 1, 2010
| Author: Suyash Deep Rai
| Source: Suyash Deep Rai
YDF Indians,
After all work on ground and activities across India YDF announcing it's exclusive youth movement "Azaadi Avaam Ki" in 24 states. All YDF state committees are directed to get ready for national meet in Delhi.*Date will be announced ...
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Sep 1, 2010
| Author: Sunita Sharma
| Source: उल्टा तीर
Ganga ke Kareeb: गंगा में प्रवाहित कर दो...............: "हम गंगा के अस्तित्व के प्रति चिन्तत है मीडिया में भी काफी गंगा प्रदुषण को लेकर चिन्तन है हिन्दुओ की आस्था विश्वास त्यौहार व स्नान इससे जु..."
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Sep 1, 2010
| Author: شمس शम्स Shams
| Source: भड़ास
हमारे डॉ.साहब रूपेश जी तो ठहरे यारों के यार बस इसी स्वभाव के चलते किसी ने अपनी वेबसाइट पर लिखने का आग्रह करा तो चल पड़े लेकिन ये न देखा कि वहाँ कैसे मक्कार, धूर्त और मुखौटेबाज बौद्धिक जुगाली करके खुद को शरीफ़ जताने वालों की भीड़ जुटी हुई है और वेबसा ...
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Sep 1, 2010
| Author: सुधीर
| Source: kabira khada bazar mein
सुधीर राघव: बोलो कौन पढ़ता है हिन्दी साहित्य#links
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Sep 1, 2010
| Author: Dr.Rupesh Shrivastava
| Source: भड़ास
आजकल रोज़ा खोलने की सहज मजहबी परंपरा जो कि अफ़्तारी कहलाती है राजनैतिक पार्टियों की चटोरे लोगों की शाम की पार्टी में बदल चुकी है जहाँ आप कबाब से लेकर टिक्का तक उड़ा सकते हैं बस बदले में एक वोट देना होगा। थू है ऐसे चटोरे लोगों की थाली में जो लोकतंत्र ...
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Sep 1, 2010
| Author: राजीव कुमार कुलश्रेष्ठ
| Source: सत्य की खोज @ आत्मग्यान
16 june 200763 वर्षीय साहिब सिंह वर्मा मजबूत कद काठी वाले धनाडय व्यक्ति थे । 42 सदस्यों वाले साहिब सिंह का संयुक्त परिवार और उनका अमीरी रहन सहन पुराने जमाने के किसी जमीदार की याद दिलाता था । साहिब सिंह खुद लेखपाल पद पर सरकारी नौकरी कर चुके थे । औ ...
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Sep 1, 2010
| Author: Dr. shyam gupta
| Source: लख़नऊ ब्लॉगर एसोसिएशन
१.
ब्रज की भूमि भई है निहाल।
आनंद कंद प्रकट भये ब्रज में, बिरज भये ब्रज ग्वाल ।
सुर - गंधर्व -अपसरा नाचहिं, गावहिं दै - दै ताल ।
आसिस देंय विष्णु, शिव, ब्रह्मा, मुसुकावें गोपाल।
जसुमति द्वारे बजे बधायो, ढफ़ ढफ़ली खडताल ।
पुरजन परिजन ह ...
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Sep 1, 2010
| Author: राजीव कुमार कुलश्रेष्ठ
| Source: सत्य की खोज @ आत्मग्यान
अब हम लोग चलते चलते बिलकुल नदी के किनारे आ गये थे । मेरी उंगलियों में एक स्पेशल चाबी का गुच्छा घूम रहा था । जिसमें छोटे साइज के । मगर शक्तिशाली चाकू । टार्च । और लाइटर जैसे कुछ आयटम फ़ंसे हुये थे । चलते चलते ही मैंने एक बबूल की कलम जितनी पतली टहनी ...
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Sep 1, 2010
| Author: राजीव कुमार कुलश्रेष्ठ
| Source: सत्य की खोज @ आत्मग्यान
रात के ठीक दस बजे मैं वर्मा जी के साथ उनकी छत पर मौजूद था । और रेशमा को देखकर मैं पूरा हाल जान चुका था । रामवीर से भी मेरी मुलाकात हो चुकी थी । और बलात्कार के उस रहस्य पर से भी परदा उठ चुका था । दरअसल वर्मा जी के घर पहुंचने के बाद जब वर्मा जी मेर ...
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Aug 31, 2010
| Author: Suman
| Source: लोक वेब मीडिया
बाराबंकी।रुदौली निवासी मो0जफर जिसका नाम बम के कारण सुर्खियों में आया दरअसल समपत्ति विवाद का शिकार है।उसने बुढापे में रफी मेमोरियल इण्टर कालेज मसौली से सेवा निवृत्त प्रधानाचार्य तमहीद फातिमा से अपनी पहली पत्नी परवीन की उपस्थिति में जनवरी 2010 में ...
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Aug 31, 2010
| Author: Suman
| Source: लोक वेब मीडिया
बाराबंकी।बाबरी मस्जिद राम जन्म भूमि मुकदमें का निर्णय आने पर शांति व्यवस्था के बिगड़ने की तैयारियों से चिन्तित पुलिस प्रशासन को आज जैसे ही यह सूचना मिली कि नगर के व्यस्ततम चैराहे लखपेड़ा बाग के पास एक बैटरी व टाइमर से संचालित बम पड़ा हुआ है,उसके पैर ...
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Aug 31, 2010
| Author: Dr. shyam gupta
| Source: लख़नऊ ब्लॉगर एसोसिएशन
कर्णाटक महिला सेवा समिति ,बन्गलोर----.एक अभिनव संस्था
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Women activist storm into the parliament demanding 33% reservation organised by NFIW and ANHAD over 30 women activist wearing specially designed aprons with image of parliament 33% women reservation written on the one side and on the other side s ...
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Aug 31, 2010
| Author: Suman
| Source: लो क सं घ र्ष !
अमेरिकन साम्राज्यवाद के चहेते, इस देश और समाज को बांटने के लिए एस.एम.एस भारी संख्या में भेज रहे हैं जिसकी विषयवस्तु यह है
राममंदिर के लिए प्रार्थना कीजिये
15 सितम्बर को कोर्ट का फैसला है
इस मैसेज को आग की तरह फैलाना है
जो हिन्दू राम का नहीं
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Aug 31, 2010
| Author: Akbar Khan
| Source: TheNetPress.Com
अपनी कलम के बूते पर दूसरों का शोषण रोकने वाला विशेषतौर पर कस्बाई मीडियाकर्मी आज खुद ही सर्वाधिक शोषित है, कभी-कभी तो शोषकों(अख़बार मालिकों) की नीतियों से इस कद्र दुखी होता है कि उसे यह दुनिया ही नहीं सुहाती और अपनी जान तक दे देता है। ऐसी ही चर्चा ...
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Aug 31, 2010
| Author: सुधीर
| Source: kabira khada bazar mein
सुधीर राघव: वेतनभोगी और नेता#links
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Aug 31, 2010
| Author: रश्मि प्रभा...
| Source: मेरी भावनायें...
बहुत बड़ी धरती मुझे मिली है
मिला है बहुत बड़ा आकाश
इस छोर से उस छोर तक
क्षितिज का साथ है !
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Aug 30, 2010
| Author: डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
| Source: रायटोक्रेट कुमारेन्द्र
आज शाम को अपने शहर की सड़कों को नापने के नियमित क्रम में हमारी मुलाकात हमारे एक मित्र से हो गई जो मानदेय प्रवक्ता के रूप में पास के जिले के महाविद्यालय में कार्यरत हैं। (मानदेय प्रवक्ता के बारे में बाद में) उसको देखते ही इधर-उधर की बातों के साथ ही ...
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लखनऊ 30 अगस्त। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के आह्वान पर आज पूरे प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर भाकपा कार्यकर्ताओं ने किसानों की उपजाऊ जमीनों के अधिग्रहण के खिलाफ जुलूस निकाले और धरना दिये।
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Aug 30, 2010
| Author: भूतनाथ
| Source: शब्दकार
मैं भूत बोल रहा हूँ..........!!
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Aug 30, 2010
| Author: भूतनाथ
| Source: रांचीहल्ला
मैं भूत बोल रहा हूँ..........!!
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Aug 30, 2010
| Author: संजय ग्रोवर Sanjay Grover
| Source: saMVAdGhar संवादघर
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Aug 30, 2010
| Author: अरविन्द श्रीवास्तव
| Source: जनशब्द
अशोक गुप्ता / कथाकार एवं आलोचकदरअसल हिन्दी साहित्य की दुनिया में लोग अपना मत अभिमत स्थितियों की स्वंतंत्र मेरिट पर, यथा समय व्यक्त नहीं करते बल्कि उसे शातिराना ढंग से खुद का दामन बचाते हुए, किन्ही भी अप्रत्यक्ष मुद्दे पर हो-हल्ले के बीच व्यक्त ...
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Aug 30, 2010
| Author: नरेन्द्र व्यास
| Source: आखर कलश
रचनाकार परिचय
नाम- डॉ. विजय कुमार सुखवानी
जन्म तिथि- ०१ अक्टूबर १९६९
जन्म स्थान- ग्वालियर म.प्र.
शिक्षा- आई आई टी मुम्बई से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में पीएचडी
भाषा ज्ञान- हिंदी अंग्रेजी उर्दू सिंधी
सम्प्रति- रीडर मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग ...
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Aug 30, 2010
| Author: zeashan zaidi
| Source: हमारी अन्जुमन
आवाज़ के बारे में प्राचीनकाल से ही वैज्ञानिकों ने काफी रिसर्च की है। आवाज पानी की लहर की तरह होती है, ये बात ग्रीक फिलास्फर क्रिसिप्पस (240BC) को मालूम थी। अरस्तू (384-322BC) ने बताया कि आवाज़ हवा में पानी की लहरों की तरह आगे बढ़ती है और जब कानों ...
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Aug 29, 2010
| Author: अशोक कुमार पाण्डेय
| Source: असुविधा
काफी आग्रहों के बाद प्रतिभा कटियार ने अपनी कवितायें भेजीं भी तो मेल का विषय लिखा- एक अकवि की कवितायें… लेकिन उनकी कवितायें और आलेख पढ़ते हुए मुझे तो वह हमेशा ही एक आदमक़द रचनाकार लगी हैं। आप भी पढ़िये और बताईये…
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Aug 29, 2010
| Author: सुमन'मीत'
| Source: ❀अर्पित ‘सुमन’❀
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Aug 29, 2010
| Author: डा. महाराज सिंह परिहार
| Source: विचार-बिगुल
लोकसभा में सदस्यों के वेतन का मसला उठा। इस संदर्भ में मीडिया ने अपने समाचारों तथा बहस के द्वारा सिद्ध किया कि अधिकांश सांसदों की आय में कई गुना की वृद्धि हुई है। माना जा सकता है कि यह सब दूसरे रास्ते से हुआ होगा जिसपर आज देश चल रहा है। वस्तुतः दे ...
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Aug 29, 2010
| Author: अशोक कुमार पाण्डेय
| Source: युवा दखल
युवा संवाद की स्थानीय इकाई तत्काल प्रभाव से भंग कर दी गयी है।
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Aug 28, 2010
| Author: डा. महाराज सिंह परिहार
| Source: विचार-बिगुल
विचार-बिगुल: आगरा में संपन्न ब्लोगर्स मीट के फोटोग्राफ्स
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Aug 28, 2010
| Author: रवि कुमार, रावतभाटा
| Source: सृजन और सरोकार
चूम चरण मत चोरों के तू – निराला ( a kavita poster by ravi kumar, rawatbhata) ००००० रवि कुमार
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Aug 28, 2010
| Author: समय
| Source: समय के साये में
हे मानवश्रेष्ठों,
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Aug 28, 2010
| Author: अरविन्द श्रीवास्तव
| Source: जनशब्द
चित्र में बायें से - अरविन्द श्रीवास्तव, शहंशाह आलम, राजेन्द्र राजन, डा. इम्तियाज अहमद, डा. खगेन्द्र ठाकुर, डा. अली जावेद, शकीलसिद्दिकी, अरुण कमल,कर्मेन्दु शिशिर.....डा. व्रज कुमार पाण्डेय बिहार प्रगतिशील लेखक संध के तत्चावधान में माध्यमिक शिक्षक ...
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Aug 28, 2010
| Author: रश्मि प्रभा...
| Source: मेरी भावनायें...
मैं हमेशा खो जाती हूँ
फिर ढूंढती हूँ खुद को
सबके दरवाज़े खटखटाती हूँ
पर कहीं नहीं मिलती...
दम घुटता तो है
पर तलाश जारी है अपनी
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Aug 27, 2010
| Author: डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर
| Source: रायटोक्रेट कुमारेन्द्र
भगवाधारियों से सावधान! देश के सर्वोच्च पदधारी मंत्री जी सावधान कर रहे हैं तो सावधान तो होना ही पड़ेगा। एक बार पहले भी चेताया गया था और कोई नहीं माना तो बम धमाके हो गये। देश में किस तरह की स्थिति बनती जा रही है इस पर कोई विचार नहीं किया जा रहा है ब ...
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Aug 27, 2010
| Author: Vivek Ranjan Shrivastava
| Source: रांचीहल्ला
देश दिखता मुझे बहुत बीमार है...........
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Aug 27, 2010
| Author: प्रबल प्रताप सिंह्
| Source: TheNetPress.Com
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Aug 27, 2010
| Author: इस्लामिक वेबदुनिया
| Source: हमारी अन्जुमन
क्या आपने भी सुना था कि खाड़ी युद्ध के दौरान तीन हजार अमेरिकी सैनिकों ने इस्लाम अपना लिया था। यह सच है। बहुत कम लोग जानते हैं कि इस बदलाव के पीछे कौन हैं? जिन लोगों ने इस्लाम की यह दावत इन अमेरिकी सैनिकों तक पहुंचाई उनमें से एक अहम शख्सियत हैं डॉ ...
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Aug 26, 2010
| Author: नरेन्द्र व्यास
| Source: आखर कलश
शाहिद मिर्ज़ा शाहिद
अजब वफ़ा के उसूलों से ये ”वफ़ाएं” हैं
तेरी जफ़ाएं, ”अदाएं”, मेरी ”ख़ताएं” हैं
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Aug 26, 2010
| Author: संजय ग्रोवर Sanjay Grover
| Source: saMVAdGhar संवादघर
मोहतरिम शरद जोशी जी, मुआफ करना, जब आप नहीं रहे तभी पता चला कि आप थे। गलती आप ही की रही कि इतनी देर लगा दी जाने में। आपके अनेक समकालीन आपसे पहले चले गए और अब अपने-अपने शरीरों, खबरों और पुरस्कारों में खूब ज़ोर-शोर से जिन्दा हैं। और तो और जो लोग आपके ...
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Aug 26, 2010
| Author: नारदमुनि
| Source: रंगकर्मी Rangkarmi
संवेदनशील कवि की दो लाइन से बात आरम्भ करते हैं-प्रश्नोत्तर चलते रहे,जीवन में चिरकाल,विक्रम मेरी जिन्दगी,वक्त बना वेताल। ये पंक्तियां देश के आम आदमी को समर्पित हैं। उस आदमी को जिसे मैं तब से जानता हूँ जब से अखबार पढना शुरू किया था। आम आदमी!मतलब,जो ...
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Aug 24, 2010
| Author: Truth or Dare
| Source: Truth OR Dare
बंगलूरु एक बहुत ही तेजीसे बढ़ने वाले शहरों की दौड़ में शामिल हैं। आजसे दस साल पहले हैदराबाद के पीछे था। लेकिन अब जनगणना के अधार पे यह भारत का तीसरा बड़ा शहर माना जाता हैं। यहाँ हर रोज नए माँल और नए टावर्स खड़े होते हैं। हर टावर्स में कई ओफिसेस हो ...
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Aug 23, 2010
| Author: भूतनाथ
| Source: शब्दकार
धरती के उपर है एक और समन्दर....!!
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Aug 23, 2010
| Author: भूतनाथ
| Source: रांचीहल्ला
धरती के उपर है एक और समन्दर....!!
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Aug 23, 2010
| Author: zeashan zaidi
| Source: हमारी अन्जुमन
रमजानुलमुबारक के मौके पर आज हम बात करते हैं कि रोज़े किस तरह इंसान के ज़हन व रूह को कूवत बख्शते हैं।
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प्रत्येक विश्व युवा एवं छात्र उत्सव के पहले अंतर्राष्ट्रीय तैयारी बैठक (आईपीएम) का आयोजन एक परंपरा है। 17वें विश्व युवा एवं छात्र उत्सव के लिए आईपीएम का आयोजन काराकस, वेनेजुएला में हुआ जिसने 16वें विश्व युवा एवं छात्र उत्सव की मेजबानी की थी। आपीए ...
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Aug 22, 2010
| Author: अशोक कुमार पाण्डेय
| Source: असुविधा
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Aug 21, 2010
| Author: समय
| Source: समय के साये में
हे मानवश्रेष्ठों,
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Aug 20, 2010
| Author: कमलेश भगवती प्रसाद वर्मा
| Source: kcverma :के.सी.वर्मा
किससे करूं मै बात ,उन जनाब की किससे करूं मै बात ,उन जनाब की जिनसे की है मुहब्बत बे-हिसाब कीदीखते नही वो दिन में ,रातें भी स्याह हुई हुई मद्धम रोशनाई मेरी वफ़ा-ए-महताब कीकिससे गिला करूं कहाँ तहरीर दूं ?कोई ढूंढ लाये तस्वीर मेरे ख्वाब कीबिखर ज ...
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Aug 20, 2010
| Author: अरविन्द श्रीवास्तव
| Source: जनशब्द
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Aug 20, 2010
| Author: कमलेश भगवती प्रसाद वर्मा
| Source: kcverma :के.सी.वर्मा
दीया जलता रहा मेघ बरसते रहे ,उनके दीदार को नैन तरसते रहे ।जा बसे हो जब से पिया तुम परदेश में ,नैन इक-इक पल उसी राह में भटकते रहे ।कैसी टीस उठती है इस दिल के जख्म में ,दर्दे-जुदाई में रात-दिन बिलखते रहे ।जोडती हूँ माला बिताये लम्हों की मै सदा ,पर ...
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Aug 19, 2010
| Author: सुमन'मीत'
| Source: बावरा मन
ये जो हमारा मन है ......बहुत बावरा है...........और इस मन में पनपते विचार उन्मुक्त पंछी........जो बस हर वक्त दूर गगन में उड़ना चाहते हैं .........कभी भोर की पहली किरण में.....कभी शाम की लाली में.......तो कभी रात की तन्हाई में............बस चहलकदमी ...
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Aug 19, 2010
| Author: Rajeev Bharol
| Source: इन्द्रधनुष
मेरी हिम्मत के पौधे को वो आकर सींच जाती है,
अकेला जान कर मुझको, हवा तेवर दिखाती है.
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Aug 18, 2010
| Author: Mahavir Mittal
| Source: TheNetPress.Com
गरीबों का राशन डकार रहे है अमीर
सफीदों, (हरियाणा) : सफीदों में अमीरों की बल्लेबल्ले है तथा गरीब थल्लेथल्ले है, क्योंकि सरकार द्वारा गरीबों के लिए शुरू की गई बी.पी.एल. राशन योजना से क्षेत्र के सैंकड़ों गरीब महरूम हैं। गरीबों के उत्थान के लिए सरका ...
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Aug 18, 2010
| Author: Sushil Gangwar
| Source: Sakshatkar.com
अभी कुछ इंतजार करो
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Aug 17, 2010
| Author: सुमन'मीत'
| Source: ❀अर्पित ‘सुमन’❀
गुलज़ार जी एक बेमिसाल लेखक हैं और जब जगजीत सिंह जी उनके लफ्जों को सुर देते हैं तो वो एक दूसरे के पूरक बन जाते हैं .................
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Aug 17, 2010
| Author: राजीव कुमार कुलश्रेष्ठ
| Source: सतगुरु कबीर साहेब
लेखकीय - यह सिर्फ़ विनय जी की ही बात नहीं है । प्रत्येक इंसान अपने जीवन में ऐसी स्थिति से कभी न कभी दो चार होता ही है । प्रभु की कृपा है । लगभग अठारह साल की निरन्तर तलाश और अथक मेहनत के बाद महाराज जी की कृपा से आज मेरे जीवन में किसी प्रकार का प्रश ...
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Aug 17, 2010
| Author: संजय ग्रोवर Sanjay Grover
| Source: saMVAdGhar संवादघर
अखबार में छपने के लिए चाहिए
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Aug 16, 2010
| Author: नारदमुनि
| Source: रंगकर्मी Rangkarmi
आजादी की ६३वी सालगिरह,सावन की बरसात,दोस्त के साथ, चले गए पीपली लाइव देखने। सालों बाद किसी फिल्म को थियेटर में देखने का मन बना था। बनना ही था। प्रिंट और इलेक्ट्रोनिक मीडिया ने इसकी इतनी बल्ले बल्ले की कि हमें ऐसा लगा अगर पीपली को नहीं देखा तो हमार ...
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Aug 15, 2010
| Author: आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'
| Source: शब्दकार
स्वाधीनता दिवस पर विशेष रचना:
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Aug 14, 2010
| Author: रौशन जसवाल विक्षिप्त
| Source: आधारशिला
सभी मित्रों को स्वतंत्रता दिवस की अनेकानेक मंगलकामनायें।
मित्रों के साथ साँझा करें !
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Aug 14, 2010
| Author: रवि कुमार, रावतभाटा
| Source: सृजन और सरोकार
आज़ादी की पूर्व संध्या पर… बिना किसी भूमिका के, मित्रों द्वारा मेल से भेजा गया एक चित्र प्रस्तुत है… स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाओं के साथ…. ००००० रवि कुमार
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Aug 14, 2010
| Author: सुमन'मीत'
| Source: बावरा मन
15 अगस्त 1947 हमारा प्रथम स्वतंत्रता दिवस...............वो दिवस जिसे सभी आँखें देख पाई न देख सके हमारे शहीद जवान जो अपनी मातृभूमि के लिये हंसते हंसते कुर्बान हो गये । आज हमारे 63वें स्वतंत्रता दिवस पर ‘श्री माखनलाल चतुर्वेदी जी’ की यह कविता उन सभ ...
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Aug 14, 2010
| Author: थिरकन
| Source: रंगकर्मी Rangkarmi
आज़ादी का जश्न हम सब मना रहे हैं। लेकिन आज़ादी के मायने क्या हैं इस पर हम सब को सोचना चाहिये। हमें आज़ादी तो मिली पर उसके साथ कुछ ज़िम्मेदारियां भी आयीं। क्या हमने उन ज़िम्मेदारियों के प्रति ईमानदारी दिखाई? अगर नही तो आज फिर मौका है उस ज़िम्मेदार ...
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Aug 13, 2010
| Author: समय
| Source: समय के साये में
हे मानवश्रेष्ठों,
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Aug 13, 2010
| Author: कमलेश भगवती प्रसाद वर्मा
| Source: kcverma :के.सी.वर्मा
इस कदर को जिंदगी को क्यूँ उलझाते हैं लोगहैं जहाँ मुश्किले वहीं क्यूँ दिल लगते हैं लोग ॥ अनसुलझी पहेली बन के रह गयी जिन्दगी , फिर क्यूँ नही इस पहेली को सुलझाते हैं लोग ,। उलझी -उलझी जिन्दगी बन गयी है बोझ अगर, हंस -हंस कर क्यूँ नहीं इसे उठाते ...
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Aug 12, 2010
| Author: Suyash Deep Rai
| Source: Suyash Deep Rai
आज जानकर बड़ा आश्चर्य हुआ कि मै भारत जैसे दुनिया के सबसे अजीब देश में रह रहा हूँ ! क्या कहने इस देश के ! खैर अब आते हैं मूल मुद्दे पर ! काफी दिनों से व्यापक रूप से बहस चल रही है कि जनता बेवकूफ है जो गंदे नेताओं को चुनती है, नेता गंदे हैं, पुलिस ...
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Aug 12, 2010
| Author: Rajeev Bharol
| Source: इन्द्रधनुष
बह्र रमल मुसम्मन महज़ूफ (२१२२ २१२२ २१२२ २१२)
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Aug 11, 2010
| Author: राजीव कुमार कुलश्रेष्ठ
| Source: सतगुरु कबीर साहेब
आना है तो आ राह में कुछ देर नहीं है ।
भगवान के घर देर है । अन्धेर नहीं है ।
जब तुझसे न सुलझे तेरे उलझे हुये फ़न्दे ।
भगवान के इंसाफ़ पर सब छोड दे बन्दे ।
आना है तो आ राह में कुछ देर नहीं है ।
भगवान के घर देर है । अन्धेर नहीं है ।
खुद ही तेरी ...
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Aug 11, 2010
| Author: राजीव कुमार कुलश्रेष्ठ
| Source: सतगुरु कबीर साहेब
मेरे सतगुरु दीनदयाल काग से हंस बनाते है ।
अजब है गुरुओं का दरबार । भरा जहां भक्ती का भंडार ।
शबद अनमोल सुनाते हैं । कि मन का भरम मिटाते हैं ।
मेरे सतगुरु दीनदयाल काग से हंस बनाते है ।
गुरूजी सत का देते ग्यान । जीव का हो ईश्वर से ध्यान ।
वो अ ...
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Aug 8, 2010
| Author: सुमन'मीत'
| Source: ❀अर्पित ‘सुमन’❀
टिप्पणी देना भी एक कला है ।जिस तरह अपने विचारों , अपने मन के भावों को शब्दों में पिरोकर हम लिखते हैं वो हमारी अपनी अनुभूती होती है अपने विचारों के प्रति .............वो विचार जो धीरे धीरे मानसपटल पर विचरते हुए लेखनी से कोरे कागज में रंग भर देते ह ...
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Aug 7, 2010
| Author: रवि कुमार, रावतभाटा
| Source: सृजन और सरोकार
कुछ आधुनिक सा पुरातन ( a pencil sketch by ravi kumar, rawatabhata ) बहुत पुरानी बात है, अक्सर पुरानी ही बातों का जिक्र किया जाता है. पर यह इतनी पुरानी भी नहीं, समय के सापेक्ष इस घटना को आधुनिक सा ही कुछ कह सकते हैं, परंतु वास्तव में यह पुरातन सा ...
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Aug 6, 2010
| Author: सुमन'मीत'
| Source: बावरा मन
आजकल चाँद बादलों के संग आँख मिचोली करता रहता है और मुझे मेरा आसमां कुछ यूं नजर आता है.........................
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Aug 5, 2010
| Author: अशोक कुमार पाण्डेय
| Source: असुविधा
इधर कुछ नया नहीं
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Aug 4, 2010
| Author: Rajeev Bharol
| Source: इन्द्रधनुष
बह्र मुतकारिब मुसम्मन् सालिम (१२२ १२२ १२२ १२२)
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Aug 3, 2010
| Author: रौशन जसवाल विक्षिप्त
| Source: आधारशिला
पिछली रात मेरे शहर कुमारसेन में भारी बरसात हुई। पिछली रात 11 बजे के बाद बर्षा शुरू हुई जिसने भयकर रूप धारण किया और रात 2:30 बजे तो बहुत ही पानी बरसा। इस वर्षा से काफी नुकसान हुआ । मेरे मित्र रमेश चौहान ने कुछ छाया चित्र भेजे है।
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Aug 3, 2010
| Author: अशोक कुमार पाण्डेय
| Source: युवा दखल
( यह आलेख हमे युवा संवाद उज्जैन की अपूर्वा ने भेजा है। आमतौर पर यह कहा जाता है कि जाति प्रथा अब ख़त्म हो रही है, कमज़ोर पड़ रही है…आदि-आदि…यह लेख तस्वीर का दूसरा रुख दिखाता है)
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Jul 31, 2010
| Author: Suman
| Source: भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी बाराबंकी
थम नहीं रहा है थाईलैंड का संकट
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Jul 31, 2010
| Author: Sushil Gangwar
| Source: Sakshatkar.com
केपी कृष्णाउन्नी का कोच्चि में निधन : कार्तिक बरुआ ने मुंबई में ली अंतिम सांस : पीटीआई के वरिष्ठ पत्रकार के पी कृष्णाउन्नी का सुबह कोच्चि के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। उनके परिवार ने बताया कि 92 साल के कृष्णाउन्नी पिछले कुछ समय से बीमार थ ...
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Jul 31, 2010
| Author: Sushil Gangwar
| Source: Sakshatkar.com
श्रमजीवी पत्रकारों के वेतनमान को लेकर केंद्र सरकार की तरफ से बनाए गए वेज बोर्ड की दिल्ली में मंगलवार को हुई बैठक में जनसत्ता के पत्रकार अंबरीश कुमार ने देश भर के पत्रकारों की सामाजिक आर्थिक सुरक्षा का सवाल उठाया और बोर्ड ने इस सिलसिले ठोस कदम उठा ...
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Jul 31, 2010
| Author: अशोक कुमार पाण्डेय
| Source: युवा दखल
युवा संवाद, ग्वालियर
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Jul 30, 2010
| Author: Truth or Dare
| Source: Truth OR Dare
नेता लोग ऐसा क्यूँ करते हैं ?
संसद भवन सर पे लेकर नाचते हैं
कभी कूदते हैं,
चिल्लाते हैं,
"बन्दर" की तरह उछलते हैं
कभी तोड़ फोड़ तो कभी माइक उठाकर
मारने दौड़ते,
कभी अपनेही साथियों को कुचलते हैं
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Jul 29, 2010
| Author: Suman
| Source: भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी बाराबंकी
युद्ध कभी धार्मिक नहीं होता
या फिर यों कहा तो युद्ध का कोई धर्म नहीं होता है
यह बात अलग है कि विजय के
बाद धर्म जयी के साथ हो जाता है
यदि राम रावण युद्ध में
रावण जीत गया होता
तो हमारा सारा समय
सीता को कुलटा कहते बीतता
रात कायर, लक्ष्मण हिज ...
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Jul 24, 2010
| Author: अशोक कुमार पाण्डेय
| Source: हमकलम : वह जो मैं नहीं लिख पाया
यहां पढ़ें कवि और कविता पर एकांत श्रीवास्तव का वक्तव्य
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Jul 21, 2010
| Author: रौशन जसवाल विक्षिप्त
| Source: आधारशिला
लगभग एक माह तक अपने ब्लाग पर कुछ भी नहीं लिख पाया । इस दौरान पत्नी की अस्वस्थता के कारण चण्डीगढ़ था। आज जब नेट पर आया तो पाबला जी की दुर्घटना की खबर पढ़ी। जान कर दुख हुआ। आशा है पाबला जी अब ठीक होंगे। पाबला जी से मात्र एक बार फोन पर बात हुई ...
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Jul 20, 2010
| Author: महफूज़ अली
| Source: मेरी रचनाएँ !!!!!!!!!!!!!!!!!
आज बहुत दिनों के बाद वक़्त मिला है कुछ लिखने का... वक़्त क्या .... समझ लीजिये मूड... बना है. इस दौरान सिर्फ पढ़ा है... और खूब पढ़ा है... लिखा भी है... वक़्त की कमी तो है ही... पर वो कहते हैं ना कि वक़्त निकालना पड़ता है , सो, आज वक़्त निकाल लिया ...
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Jul 17, 2010
| Author: Suman
| Source: भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी बाराबंकी
हम गाएंगे / अंधेरों में भी /
जंगलों में भी / बस्तियों में भी /
पहाड़ों पे भी / मैदानों में भी /
आँखों से / होठों से /
हाथों से / पाँवों से /
समूचे जिस्म से /
ओ हिटलर!
हमारे घाव / हमारी झुर्रियाँ /
हमारी बिवाइयाँ / हमारे बेवक़्त पके बाल /
ह ...
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Jul 16, 2010
| Author: Suyash Deep Rai
| Source: Suyash Deep Rai
ज़ाती आधारित जनगणना का वास्तविक प्रयोजन क्या है ! क्या वाकई में भारत वर्ष की वर्त्तमान वस्तु स्तिथि के किसी सुधार के लिए यह कदम उठाया गया है ! या राजनैतिक पार्टियों के व्यक्तिगत ज़ाती आधारित वोट बैंक में सेंध मारने की कोशिश है ! क्षेत्रीय पार्ट ...
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Jul 4, 2010
| Author: Truth or Dare
| Source: Truth OR Dare
बंद के नाम से देश के धन को क्यूँ जला रहे हैं यहाँ
जिम्मेदार ही जिम्मेदारियों को क्यूँ भुला रहे हैं यहाँ
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Jun 28, 2010
| Author: अशोक कुमार पाण्डेय
| Source: हमकलम : वह जो मैं नहीं लिख पाया
खुब गए
दूधिया निगाहों में
फटी बिवाइयोंवाले खुरदरे पैर
धँस गए
कुसुम-कोमल मन में
गुट्ठल घट्ठोंवाले कुलिश-कठोर पैर
दे रहे थे गति
रबड़-विहीन ठूँठ पैडलों को
चला रहे थे
एक नहीं, दो नहीं, तीन-तीन चक्र
कर रहे थे मात त्रिविक्रम वामन के पुराने पै ...
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Jun 23, 2010
| Author: पार्थिव कुमार
| Source: सराय
जार्ज एवरेस्ट की खस्ताहाल यादगार
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May 31, 2010
| Author: महफूज़ अली
| Source: मेरी रचनाएँ !!!!!!!!!!!!!!!!!
दुनिया में इन्सान जब जन्म लेता है, तब वह अपने साथ कोई नाम नहीं लाता. हाँ! फ़ौरी तौर पर उसका नामकरण कर दिया जाता है. जैसे:- पप्पू, बिल्लू, पिंकी, चिंटू, बाबू.. आदि और भी बहुत से नाम. नाम तो पैदा होने के कुछ दिनों पर रखा जाता है, जिसे हम बाकायदा न ...
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May 17, 2010
| Author: अशोक कुमार पाण्डेय
| Source: हमकलम : वह जो मैं नहीं लिख पाया
(आज मंगलेश जी का जन्मदिन है…मुझे उनसे व्यक्तिगत परिचय का सौभाग्य तो नहीं मिला लेकिन उनको लगातार पढ़ते हुए मुझे हमेशा एक परिचय का एहसास होता रहा है। आज सबद पर व्योमेश शुक्ल का आलेख पढ़कर मुझे उनकी ढेरों कवितायें याद आईं…उनमें से एक यहां…और शुभकामन ...
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May 13, 2010
| Author: Suman
| Source: Ganga ke Kareeb
न्यायिक कार्य से छुट्टी पाने के बाद कुछ देर के लिए जज साहब का हमारे साथ बैठना हुआ। बातचीत के दौरान जज साहब बोले, ‘‘ मेरा एक मुसलमान दोस्त राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का कार्यकर्ता है।’’
मेरा संबंध उस लोकसभा क्षेत्र है जहां से किसी जमाने में सुभ ...
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May 13, 2010
| Author: Suman
| Source: Ganga ke Kareeb
सम्मानीय चिट्ठाकार बन्धुओं,
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May 12, 2010
| Author: Suman
| Source: Ganga ke Kareeb
डेविड कोलमैन हेडली का नाम मुम्बई की 26/11 की तबाही के बाद सामने आया। एक गुनहगार, इंसानियत का दुश्मन को फांसी की सजा अदालत से मिल चुकी है, दूसरे गुनहगार को अमेरिका बचाने में लगा हुआ है, यह गुनहगार और कोई नहीं यही है डेविड कोलमैन हेडली जो एफ0ब ...
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May 7, 2010
| Author: Amit K Sagar
| Source: उल्टा तीर
नच की दुनिया (परदे के पीछे की कहानी)
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Apr 25, 2010
| Author: rafiq khan
| Source: सत्य-इस्लाम
इस्लाम के मूल स्रोत दो है पहला कुरआन और दूसरा हदीस.
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Apr 23, 2010
| Author: अशोक कुमार पाण्डेय
| Source: अर्थात
एक आर्थिक सर्वसत्ता वाद गोलियों से नहीं वरन अकालों से हत्या करता है।
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Apr 23, 2010
| Author: rafiq khan
| Source: सत्य-इस्लाम
इस्लाम में पांच बातों के बारे में ये कहा गया है कि ये इस्लाम के पांच स्तम्भ है. इन पाँचों स्तंभों
में से एक भी स्तम्भ ढह जाये तो इस्लाम की पूरी इमारत ढह जाती है. कहने का मतलब ये है कि
जब तक इन पांचो स्तंभों पर पूर्ण विश्वास और पालन न किया जाए क ...
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Apr 21, 2010
| Author: rafiq khan
| Source: सत्य-इस्लाम
इस्लाम की परिभाषा
इस्लाम शब्द अरबी भाषा का शब्द है जिसका अर्थ है अमन,शान्ति,अच्छाई,आत्मसमर्पण व सलामती.
संक्षेप में ईश्वर के आदेशों और ईश्वर के पैगम्बर हजरत मुहम्मद सल्ल: की शिक्षाओं को इस्लाम कहते है.
और इस्लाम के अनुयायी को मुस्लिम या मुसलमा ...
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Apr 18, 2010
| Author: प्रमोद
| Source: हिन्दी के चिराग
राष्ट्रीयता एवं जागरण की चेतना के साथ-साथ भारत के गौरवमयी अतीत की पहचान तथा रुढियों की जंजीरों में जकड़ी वर्त्तमान व्यवस्था के प्रति असंतोष से उत्पन्न क्रांति की आहवान करने वाले राष्ट्रकवि रामधारी सिंह 'दिनकर' के व्यक्तित्व एवं कृतित्व का एक परिच ...
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Apr 16, 2010
| Author: rafiq khan
| Source: इस्लाम हिन्दी
आज के इस दौर में जिहालत की वजह से मुसलमान मर्द और औरतें जो मुंह में
आया बोल दिया करते हैं और कुछ ऐसी बातें भी बोल दिया करते हैं जिनसे आदमी
इस्लाम से निकल जाता है मतलब काफिर हो जाता है और उसका निकाह भी टूट
जाता है और उसे कोई खबर भी नहीं होती.अच ...
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Apr 15, 2010
| Author: rafiq khan
| Source: कंप्यूटर हिन्दी
अक्सर ऐसा होता है कि हम अपने कंप्यूटर से कोई सोफ्टवेयर या प्रोग्राम को
रिमूव करते हैं तो वो प्रोग्राम all programs से तो हट जाता है लेकिन add
or remove programs में उसकी एंट्री रह जाती और वहां हमें प्रोग्राम का
नाम नज़र आ रहा होता है. ऐसा प्रो ...
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Apr 13, 2010
| Author: rafiq khan
| Source: इस्लाम हिन्दी
तौहीद व रिसालत की तरह क़यामत पर भी ईमान लाना जरूरी है.क़यामत का इनकार
करने वाला काफिर है.हर मुसलमान के लिए इस अकीदे पर ईमान लाना जरूरी है कि
एक दिन ये सारी दुनिया जमीन व आसमान बल्कि पूरा ब्रह्माण्ड फना(ख़त्म) हो जायेगा.
इसी का नाम क़यामत या प्रलय ...
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Apr 11, 2010
| Author: rafiq khan
| Source: इस्लाम हिन्दी
मरने के बाद और क़यामत(प्रलय) से पहले दुनिया और आखिरत के बीच एक और
दुनिया है जिसे आलमे बर्जख या बर्जखी दुनिया कहते हैं.सभी इंसानों और जिन्नात
को मरने के बाद इसी दुनिया में रहना होता है.इस बर्जखी दुनिया में अपने अपने
आमाल(कर्मों) के ऐतबार से किस ...
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Apr 9, 2010
| Author: Amit K Sagar
| Source: उल्टा तीर
प्रिय दोस्तों, पाठकों एवं उल्टा तीर साथियो,
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Apr 4, 2010
| Author: rafiq khan
| Source: कंप्यूटर हिन्दी
ऑटोप्ले विंडोज का बहुत अच्छा फीचर है.ये ऑन होने पर हमारी सीडी
या पेन ड्राइव कंप्यूटर में डालते ही ऑटो प्ले मतलब अपने आप खुल जाती
है.हमें खोलने की मेहनत नहीं करनी पड़ती.लेकिन कई बार ऑटो प्ले होना
बहुत खतरनाक भी हो जाता है जब हमारी सीडी या पेन ड ...
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Mar 28, 2010
| Author: पार्थिव कुमार
| Source: सराय
भुतहे खंडहरों का सच
पार्थिव कुमार
अरावली की गोद में बिखरे भानगढ़ के खंडहरों को भले ही भूतों का डेरा मान लिया गया हो मगर सोलहवीं सदी के इस किले की घुमावदार गलियों में कभी जिंदगी मचला करती थी। किले के अंदर करीने से बनाए गए बाजार, खूबसूरत मंदिरों, ...
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Mar 22, 2010
| Author: Suman
| Source: लोकसंघर्ष छाया
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Mar 21, 2010
| Author: rafiq khan
| Source: कंप्यूटर हिन्दी
इन्टरनेट का सबसे ज्यादा इस्तेमाल ईमेल भेजने या मंगाने में किया
जाता है जो की बिल्कुल मुफ्त सर्विस है और बहुत उपयोगी भी.लेकिन
कुछ लोग मुफ्त होने के कारण इसका इस्तेमाल लोगों को परेशान करने
के लिए करते हैं.कुछ यार दोस्त भी फ़ालतू मेल भेजते रहते ह ...
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Mar 7, 2010
| Author: अशोक कुमार पाण्डेय
| Source: अर्थात
ग़रीबी की बहस हमारे देश में बहुत पुरानी है। औपनिवेशिक ग़ुलामी से मुक्ति के बाद से ही हमारे विकास की तमाम योजनाओं में ग़रीबी हटाने और देश के भीतर व्याप्त सामाजार्थिक विषमता को दूर करने की बातें की जाती रहीं। लोकतांत्रिक प्रणाली और शायद गांधी के ग्राम ...
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Feb 20, 2010
| Author: अशोक कुमार पाण्डेय
| Source: अर्थात
(जाने-माने अर्थशास्त्री गिरीश मिश्र जी का यह आलेख अभी हाशिया पर पढ़ा … मुझे बेहद उपयोगी लगा तो यहां भी लगा दिया )
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Jan 7, 2010
| Author: पार्थिव कुमार
| Source: सराय
मुगलों का महल बना बच्चों की क्रिकेट पिच
पार्थिव कुमार
फारुखनगर के रिटायर्ड टीचर राज कंवर गुप्ता तकरीबन 300 साल पुराने इस कस्बे के हर बाशिंदे को इसके शानदार माजी के बारे में बता देना चाहते हैं। उन्हें उम्मीद है कि ऐसा करके वह बादशाह फर्रुखसियर क ...
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Jan 1, 2010
| Author: Suman
| Source: लोकसंघर्ष छाया
लोकसंघर्ष सुमन के साथ श्रीमती रामा रानी सिंह
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Jan 1, 2010
| Author: Suman
| Source: लोकसंघर्ष छाया
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Nov 22, 2009
| Author: Jyoti
| Source: KVITA & MERE SAPNE
न जाने क्यू तुम बहोत यादआ रहे हो
भुलाना चाहू तो ,भूल नही पाते हम ,
मिलने की आस है ,क्या मै इस जनम में तुम्हे मिल पाऊँगी ?
तुम भी तो चाहते होंगे ,हम मिले ,बीते लम्हे याद करे
तुम्हारा तुम जानो .मेरी दिली तमन्ना है ,मेरे इंतकाल से पहले
पुरी ...
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Sep 25, 2008
| Author: प्रमोद
| Source: हिन्दी के चिराग
हिन्दी साहित्य के भक्तिकाल के कवियों में कबीरदास निर्गुण भक्ति काव्य-धारा में उच्च स्थान पर विराजमान हैं। उनका व्यक्तित्व क्रन्तिकारी व्यक्तित्व है, उन्होंने अपनी बात बेबाक ढंग से कही भले ही वह सामने वाले को कितनी भी चुभी। यद्यपि कबीर के जीवन के ...
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Sep 19, 2008
| Author: प्रमोद
| Source: हिन्दी के चिराग
हिन्दी साहित्य के भक्ति काल में भक्त कवियों ने अपने समाज और संस्कृति की रक्षा हेतु काव्य ग्रंथों की रचना की। इस काल में प्रवाहित होने वाली भक्ति काव्य धाराएँ सगुण काव्य तथा निर्गुण काव्य के रूप में दो हिस्सों में विभक्त थी। सगुण काव्य धारा की पुन ...
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